नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) छोटे और सुरक्षित निवेशकों के लिए एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है। वर्तमान में NSC पर 7.7% प्रति साल की ब्याज दर मिल रही है। यह ब्याज दर निवेश की पूरी अवधि यानी 5 साल के लिए स्थिर रहती है और इसका भुगतान मेच्योरिटी पर किया जाता है।
टैक्स लाभ और री-इन्वेस्टमेंट
NSC पर सालाना मिलने वाला ब्याज री-इन्वेस्ट माना जाता है, इसलिए यह 80C के तहत टैक्स फ्री होता है। केवल अंतिम वर्ष का ब्याज ही टैक्सेबल होता है। इस तरह, NSC निवेश न केवल सुरक्षित रिटर्न देता है बल्कि टैक्स बचत का अवसर भी प्रदान करता है।
यदि आप NSC में ₹2,50,000 का निवेश करते हैं, तो AngelOne के अनुसार रिटर्न की गणना कंपाउंडिंग इंटरेस्ट फॉर्मूले के माध्यम से की जाती है:
मैच्योरिटी अमाउंट = P × (1 + r/n)^(n×t)
जहां P निवेश की मूल राशि है, r ब्याज दर या कंपाउंडिंग रेट है, t निवेश की अवधि और n कंपाउंडिंग की फ्रीक्वेंसी को दर्शाता है। इस हिसाब से 7.7% सालाना ब्याज दर पर 5 साल के निवेश में कुल ₹1,16,062 का फिक्स रिटर्न प्राप्त होगा। इसका मतलब यह है कि पांच साल की अवधि पूरी होने पर आपके पास कुल ₹3,66,062 का सुरक्षित और फिक्स फंड तैयार हो जाएगा।
कौन कर सकता है निवेश?
NSC स्कीम में सभी भारतीय निवासी निवेश कर सकते हैं। एनआरआई (Non-Resident Indians) सीधे निवेश नहीं कर सकते, लेकिन यदि कोई निवासी निवेशक भविष्य में एनआरआई बन जाता है, तो वह पहले से रखे गए सर्टिफिकेट को परिपक्वता तक रख सकता है।
व्यक्तिगत निवेशक अपने नाम से या नाबालिग/मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के अभिभावक के रूप में भी निवेश कर सकते हैं। 10 वर्ष से अधिक उम्र के नाबालिग भी इसमें निवेश कर सकते हैं। ध्यान दें कि ट्रस्ट और HUF सीधे निवेश नहीं कर सकते, लेकिन HUF का कर्ता अपने नाम से निवेश कर सकता है।
NSC क्यों है लाभकारी?
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) निवेशकों के लिए कई कारणों से लाभकारी साबित होता है। सबसे पहले, यह एक सुरक्षित निवेश विकल्प है, क्योंकि इसमें निवेश की मूल राशि और ब्याज दोनों गारंटीड होते हैं। इसके साथ ही, NSC पर मिलने वाला ब्याज 80C के तहत टैक्स फ्री होता है, जिससे टैक्स बचाने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा, इस योजना में ब्याज दर स्थिर रहती है और पांच साल के लिए फिक्स रहती है, जिससे निवेशक को भविष्य की योजना बनाने में आसानी होती है। NSC में मिलने वाला ब्याज री-इन्वेस्टमेंट माना जाता है, यानी कंपाउंडिंग के जरिए निवेश बढ़ता है और कुल मुनाफा और अधिक होता है। इस तरह, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए एक सुरक्षित, फिक्स रिटर्न और टैक्स लाभ वाला बेहतरीन निवेश विकल्प है।





