नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर असंसदीय भाषा इस्तेमाल करने के आरोप के बाद सरकार की तरफ से प्रस्ताव लाने की चर्चा थी। हालांकि अब संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने साफ कर दिया है कि सरकार फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाएगी।
सरकार ने क्यों बदला फैसला?
किरण रिजिजू ने बताया कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पहले ही राहुल गांधी के खिलाफ एक विशिष्ट प्रस्ताव लाने का नोटिस दे चुके हैं। ऐसे में सरकार अलग से प्रस्ताव लाने से बचेगी। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया लोकसभा अध्यक्ष से सलाह लेकर तय की जाएगी। रिजिजू के मुताबिक अभी यह तय नहीं है कि मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जाएगा, आचार समिति के पास जाएगा या सीधे लोकसभा में चर्चा के लिए लाया जाएगा। सरकार इस पर संसदीय नियमों के अनुसार आगे बढ़ना चाहती है।
निशिकांत दुबे की क्या मांग?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कड़ा कदम जरूरी है। बजट सत्र के पहले चरण के आखिरी दिन विपक्ष ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका। बाद में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण पर विवाद शुरू हो गया। हंगामे की वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जवाब नहीं हो सका। हालांकि आम बजट पर चर्चा जारी रही और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना जवाब दिया। अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर है। तय किया जाएगा कि राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस पर सदन में चर्चा होगी या इसे किसी संसदीय समिति को भेजा जाएगा। सियासी तौर पर यह मामला आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।





