नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश के सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने से बड़ा हादसा सामने आया है। भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी सप्लाई होने के कारण अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि इलाके के अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
इंदौर के मेयर ने की मौतों की पुष्टि
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि दूषित पानी के कारण अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर 3 मौतों की पुष्टि की गई है। बाकी मामलों की जांच की जा रही है। दूषित पानी पीने के बाद इलाके में लोग उल्टी-दस्त का शिकार होने लगे। अब तक 1000 से ज्यादा लोगों का इलाज किया जा चुका है कई संजीवनी क्लीनिक और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी हुई है हालत बिगड़ने पर कई लोगों को भर्ती किया गया है प्राथमिक जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा में नर्मदा जल सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज हो गया था। इसी दौरान पाइपलाइन में शौचालय और ड्रेनेज का गंदा पानी मिल गया, जो सीधे लोगों के घरों तक पहुंच गया। इस पानी को पीने के बाद लोग तेजी से बीमार पड़ने लगे।
पहले से मिल रही थीं गंदे पानी की शिकायतें
इंदौर निवासी रितिका रोला का कहना है कि वे कई दिनों से नलों से बदबूदार और गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 24 दिसंबर के बाद से इलाके में उल्टी-दस्त के मामले अचानक बढ़ने लगे और स्थिति बिगड़ती चली गई। स्थिति तब और भयावह हो चली जब घर में छोटे बच्चों के लिए भी साफ पानी की आपूर्ति करना मुश्किल हो गया। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस मुख्य पानी की पाइपलाइन से इलाके में सप्लाई होती है, उसके ऊपर ही सार्वजनिक शौचालय बना हुआ था। लीकेज होने पर ड्रेनेज का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल गया कई जगह जल वितरण लाइन टूटी हुई भी पाई गई।
अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है सरकार ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं बीमार लोगों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। इलाके में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। वे घर-घर जाकर बीमार लोगों की पहचान कर रही हैं, ताकि समय रहते इलाज मिल सके और स्थिति और न बिगड़े।





