नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। वेब सीरीज घूसखोर पंडित अब सियासत में भी गर्मजोशी पैदा कर रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस विवाद में अपनी आवाज उठाते हुए कहा है कि यह सीरीज ब्राह्मण समाज का अपमान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मकारों ने सोची-समझी रणनीति के तहत ‘पंडित’ को ‘घुसपैठिया’ दिखाकर पूरे समाज का अनादर किया है। मायावती ने एक्स पर पोस्ट लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल इस वेब सीरीज पर रोक लगाने की मांग की है।
मायावती ने ब्राह्मण समाज के अपमान पर जताया गहरा रोष
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर कहा कि यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि हाल के समय में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि फिल्मों में भी ब्राह्मण समाज को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिल्मों में ‘पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में ब्राह्मण समाज का अपमान और अनादर किया जा रहा है, जिससे समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। मायावती ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है।
‘घुसपैठिया’ शब्द पर मायावती ने जताई कड़ी आपत्ति
मायावती ने अपने बयान में खासतौर पर ‘घुसपैठिया’ शब्द के इस्तेमाल को विवादास्पद बताया। विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि वेब सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है और उन्हें व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले ‘घुसपैठियों’ के रूप में पेश किया गया है। मायावती ने इसे जातिसूचक करार देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसी फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।
वेब सीरीज में क्या दिखाया गया है?
यह वेब सीरीज मुख्य रूप से सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर ध्यान केंद्रित करती है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी, जो ब्राह्मण समुदाय से संबंधित है और ‘पंडत’ उपनाम का उपयोग करता है, अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों से काम के बदले अवैध वसूली करता है। इसके साथ ही सीरीज में सिस्टम की खामियों और एक व्यक्ति के लालच को केंद्र में रखकर कहानी बनाई गई है। आरोप है कि इसमें कुछ दृश्य और संवाद भी शामिल हैं, जो सरकारी दफ्तरों में होने वाले ‘लेन-देन’ और भ्रष्टाचार के काले खेल को उजागर करते हैं।
विवाद और आपत्ति के मुख्य कारण
वेब सीरीज को लेकर ‘सनातन रक्षक दल’ और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुख्य विवाद इसका नाम है। विरोध करने वालों का तर्क है कि ‘पंडत’ शब्द ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, जबकि इसे ‘घूसखोर’ विशेषण के साथ जोड़ना पूरे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक संदेश फैलाता है। इसलिए उनका मानना है कि इस तरह के शीर्षक और कंटेंट समाज में गलत धारणाएँ और गलत संदेश पैदा कर सकते हैं।
जाति और धार्मिक भावनाओं को लेकर आपत्ति
आपत्ति दर्ज कराने वाले संगठनों का मानना है कि भ्रष्टाचार किसी भी जाति या धर्म के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, लेकिन जानबूझकर ब्राह्मण समुदाय के प्रतिनिधि को भ्रष्ट के रूप में दिखाना एक रणनीतिक एजेंडा जैसा प्रतीत होता है। वे वेब सीरीज के पोस्टर और ट्रेलर में ऐसे दृश्य भी संदिग्ध मानते हैं, जहां पात्र धार्मिक वेशभूषा या प्रतीकों के साथ गलत काम करते दिखाया गया है। उनका कहना है कि इससे न केवल जाति बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है।





