नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध व बेलपत्र अर्पित कर भोलेनाथ की कृपा पाने की कामना करते हैं। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन की गई सच्चे मन की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, लेकिन अगर पूजा-व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं, तो पुण्य की जगह दोष भी लग सकता है।
शिव पूजा में इन चीजों का न करें प्रयोग
महाशिवरात्रि के दिन पूजा सामग्री को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
केतकी का फूल: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था, इसलिए इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
सिंदूर या कुमकुम: शिवजी वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे महादेव को अर्पित करना उचित नहीं है
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तुलसी दल: शिव पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। इसकी जगह बेलपत्र, धतूरा या भांग अर्पित करें।
हल्दी: हल्दी का संबंध स्त्री तत्व से माना जाता है, जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है, इसलिए हल्दी चढ़ाने से बचें।
बेलपत्र चढ़ाते समय रखें खास ध्यान
शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन इसे चढ़ाने के भी नियम हैं। हमेशा तीन पत्तियों वाला, हरा और साबुत बेलपत्र ही चढ़ाएं। पत्तियां कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए। साथ ही बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें।
शंख से न करें शिवलिंग का अभिषेक
हालांकि भगवान विष्णु की पूजा में शंख का विशेष महत्व है, लेकिन शिव पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है। मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता। अभिषेक के लिए तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें।
खान-पान और व्यवहार में बरतें संयम
महाशिवरात्रि के दिन तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचें और सफेद, पीला या हरा रंग धारण करें। इस दिन किसी से वाद-विवाद न करें और घर में शांति बनाए रखें।
शिवलिंग की परिक्रमा का भी है नियम
अक्सर लोग पूरी परिक्रमा कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती। जलाधारी (जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है) को लांघना अशुभ माना जाता है। इसलिए वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए।





