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Monday, April 6, 2026
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UGC नियमों पर Supreme Court की रोक के बाद सियासत गरम, सपा-कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि फिलहाल 2012 वाले नियम ही लागू रहेंगे। केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सरकार के लिए बड़ा झटका बताया है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार समाज को बांटने की कोशिश कर रही थी, जिसे अदालत ने समय रहते रोक दिया।

सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आया?

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से जुड़े मामले में फिलहाल 2012 में लागू किए गए पुराने रेगुलेशन को ही प्रभावी रखने का आदेश दिया है। नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है। इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

सपा बोली- सरकार ध्यान भटकाना चाहती है

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने कहा, “सरकार कोई ऐसा काम नहीं करती जो जनता के भले के लिए हो। अगर नीयत सही होती तो बार-बार ऐसे फैसले वापस नहीं लेने पड़ते। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि संविधान पहले से ही भेदभाव के खिलाफ है।

उन्होंने कहा, “पहले नियम लाए गए, फिर उन्हें रोल बैक करना पड़ा। इससे साफ है कि सरकार खुद कन्फ्यूज है कि वह किसके साथ खड़ी है।” उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी।

कांग्रेस का हमला: सुप्रीम कोर्ट ने आग बुझाई

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सरकार का काम आग बुझाना होता है, लेकिन भाजपा जाति और धर्म के नाम पर आग लगाने का काम करती है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मंशा पहचान ली और समय रहते रोक लगा दी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों का कहना है कि यह फैसला संविधान, समानता और सामाजिक एकता की जीत है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ऐसे नियम लाकर समाज में विभाजन पैदा करना चाहती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए उस पर रोक लगा दी।

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