नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री बिहार की सियासत का एक ऐसा सवाल बन गया है जिसपर पूरे बिहार की नजरें गड़ी है। राजद, बीजेपी, जदयू,कांग्रेस, लोजपा, हम समेत सभी दलों के नेता इस पर राय जाहिर कर रहे हैं पर नीतीश कुमार और निशांत बिल्कुल खामोश हैं। सरस्वती पूजा के मौके पर ललन सिंह का एक वीडियो सामने आया है जिससे निशांत के पॉलिटिकल डेब्यू का मामला फिर गर्म हो गया है।
बातचीत का वीडियो सियासी हलचल मचा रहा है
दरअसल शुक्रवार को नीतीश कुमार पटना में एक पूजा स्थल पर पहुंचे जहां निशांत पहले से मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, विजय चौधरी समेत एनडीए के कई नेता भी वही थे। इसी दौरान ललन सिंह ने निशांत के कंधे पर हाथ रखा और कुछ बात की। इस छोटी सी बातचीत का वीडियो सियासी हलचल मचा रहा है। ललन सिंह कह रहे हैं कि अब बोल दीजिए की मान जाएंगे। आज बोल ही दीजिए। हालांकि निशांत कुमार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और मुस्कुराते हुए आगे निकल गए। ललन सिंह की बात पर वहां मौजूद लोग भी हंसने लगे। नीतीश कुमार की भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सभी पूजन दर्शन में लीन हो गए।
ललन सिंह ने भावनात्मक संदर्भ में यह बयान दिया है
बीजेपी के प्रभाकर मिश्रा ने कहा है कि निशांत कुमार में क्षमता है। वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। भाजपा का मानना है कि अंतिम फैसला निशांत कुमार ही करेंगे और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए। ललन सिंह ने भावनात्मक संदर्भ में यह बयान दिया है।
कई नेताओं ने उनके राजनीति में आने की मांग की है
इस छोटे से वीडियो पर सियासत शुरू हो गयी है। प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि वीडियो का संदर्भ क्या है यह नहीं बता सकते। ललन सिंह ने राजनीति में आने की चर्चा की थी या कोई और बात थी। निशांत कुमार एक पढ़े लिखे योग्य युवा हैं। लेकिन राजनीति में आने का फैसला उन्हे ही लेना है। प्रवक्ता मनीष यादव ने कहा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और निशांत कुमार को खुद तय करना है कि वे कब राजनीति में आएंगे। कई नेताओं ने उनके आने की मांग की है।
ललन सिंह ने भावनात्मक संदर्भ में यह बयान दिया है।
बीजेपी के प्रभाकर मिश्रा ने कहा है कि निशांत कुमार में क्षमता है। वे राजनीति में आते हैं तो बिहार को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा। भाजपा का मानना है कि अंतिम फैसला निशांत कुमार ही करेंगे और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए। ललन सिंह ने भावनात्मक संदर्भ में यह बयान दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब निशांत के राजनैतिक सफर की चर्चा हो रही है। जदयू नेता बार बार यह मुद्दा उठाते हैं। कभी पोस्टर, कभी उपवास, कभी कार्यालय में नारेबाजी जैसे मामले कई बार सामने आए हैं। उपेंद्र कुशवाहा भी निशांत की वकालत कर चुके हैं।





