नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। चंडीगढ़ में मेयर पद के लिए होने वाले नगर निगम चुनावों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस, अब अलग-अलग मैदान में हैं। गठबंधन टूटने के बाद दोनों ही पार्टियों ने मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। यह ऐलान नगर निगम चुनाव की तैयारियों को और रोचक बना रहा है और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है।
कांग्रेस के उम्मीदवार
कांग्रेस ने इस चुनाव में मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी को मैदान में उतारा है। पार्टी ने सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए सचिन गालव और डिप्टी मेयर पद के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस का मानना है कि उनके उम्मीदवारों के अनुभव और नगर निगम में सक्रिय भूमिका के कारण वे जनता का भरोसा जीत सकते हैं।
AAP के उम्मीदवार
वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। AAP की ओर से मेयर पद के लिए योगेश ढींगरा (वार्ड नं. 25) को उतारा गया है। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए पार्टी ने मुन्नवर खान (वार्ड नं. 29) और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर (वार्ड नं. 1) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। AAP का मानना है कि उनके युवा और सक्रिय उम्मीदवार जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।
गठबंधन क्यों नहीं हुआ?
इस बार AAP और कांग्रेस ने गठबंधन न बनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगर नगर निगम चुनाव में दोनों दल गठबंधन करते, तो पंजाब विधानसभा चुनाव में रणनीतिक रूप से उनकी स्थिति कमजोर हो सकती थी। इसलिए कम पार्षद होने के बावजूद दोनों दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय दोनों पार्टियों के लिए अगली रणनीति तय करने में अहम साबित होगा।
बीजेपी की स्थिति मजबूत
नगर निगम में कुल 35 पार्षद और 1 सांसद हैं। बीजेपी के पास 18 पार्षद हैं, जबकि AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद + 1 सांसद है। इन आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बीजेपी के लिए मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों पर जीत हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होगा। बीजेपी की मजबूत स्थिति और पार्षद संख्या का संतुलन इसे इस चुनाव का बड़ा दावेदार बनाता है।
चुनाव की राजनीतिक चुनौतियां
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल मेयर पद तक सीमित नहीं रहेगा। यह पंजाब विधानसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास के रूप में भी देखा जा रहा है। AAP और कांग्रेस दोनों ही अपने उम्मीदवारों के जरिए स्थानीय जनता का भरोसा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी अपने मजबूत पार्षदों और संगठनात्मक नेटवर्क के बल पर सत्ता में बने रहने की रणनीति पर काम कर रही है।
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2026 न केवल मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए, बल्कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संकेत देने वाले चुनाव के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





