नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में म्युनिसिपल चुनाव पूरे हो चुके हैं और 2026 के बीएमसी चुनाव की मतगणना जारी है। 227 वार्डों वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर अगले 5 साल तक किस पार्टी का कब्जा रहेगा, इसका फैसला आज हो जाएगा। करीब छह साल के लंबे इंतजार के बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर पूरे देश की नजर मुंबई पर टिकी हुई है। वहीं दिल्ली में भी अप्रैल में नया मेयर चुना जाना है। ऐसे में भारत के दो सबसे बड़े नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) की तुलना एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
BMC बनाम MCD: पैसे के मामले में कौन आगे?
एशिया की सबसे अमीर नगर निगम है BMC बृहन्मुंबई महानगरपालिका को भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की सबसे अमीर नगर निगम माना जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बीएमसी का बजट करीब 74,427 करोड़ रुपये है। यह बजट कई भारतीय राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। इसके मुकाबले दिल्ली की म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (MCD) ने 2026-27 के लिए लगभग 16,530 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। सीधे शब्दों में कहें तो BMC, MCD से करीब चार गुना ज्यादा अमीर है।
क्या बड़ा बजट मतलब ज्यादा ताकतवर मेयर?
अक्सर यह माना जाता है कि जिस नगर निगम के पास ज्यादा पैसा होता है, उसका मेयर भी ज्यादा ताकतवर होता है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। मुंबई में मेयर भले ही शहर का पहला नागरिक होता है, लेकिन असली प्रशासनिक ताकत म्युनिसिपल कमिश्नर के पास होती है। कमिश्नर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक सीनियर आईएएस अधिकारी होता है, जो फाइनेंस, प्रशासन, प्रोजेक्ट और स्टाफ को कंट्रोल करता है।
दिल्ली में भी मेयर नहीं, कमिश्नर होता है पावरफुल
दिल्ली की एमसीडी में भी यही सिस्टम है। यहां भी म्युनिसिपल कमिश्नर सबसे ताकतवर अधिकारी होता है। मेयर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन बड़े फैसले कमिश्नर ही लेते हैं। ऊपर से दिल्ली के मेयर का कार्यकाल सिर्फ 1 साल का होता है, जिससे उसकी ताकत और सीमित हो जाती है। मेयर होता है शहर का चेहरा मुंबई और दिल्ली दोनों जगह मेयर का काम मुख्य रूप से निगम की बैठकों की अध्यक्षता करना एजेंडा तय करना और बहस को मैनेज करना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमानों का स्वागत करना शहर के पहले नागरिक के तौर पर पहचान बनाना यानि मेयर की भूमिका ज्यादा राजनीतिक और औपचारिक होती है, न कि सीधे प्रशासन चलाने की।





