नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। पार्टी इस दिन को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मना रही है। इस मौके पर ब्लू बुक के 21वें संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। जन्मदिन के बाद बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर तेजी से काम करेगी। पार्टी मंडल स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर कार्यकर्ताओं में जोश भरेगी और वंचित वर्ग व मुस्लिम समाज को जोड़ने पर खास फोकस करेगी।
चार बार मुख्यमंत्री, आठवीं बार पार्टी की कमान
मायावती अब तक चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और आठवीं बार बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी हैं। साल 2007 को उनकी सियासत का स्वर्णिम काल माना जाता है, जब बहुजन समाज पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ यूपी में सरकार बनाई थी। यह पहली बार था जब बसपा ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। 18 सितंबर 2003 को मायावती पहली बार बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी थीं। इसके बाद से लगातार वह पार्टी की कमान संभालती आ रही हैं। मायावती का राजनीतिक सफर 1977 में शुरू हुआ, जब वे बसपा के संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आईं। कांशीराम ने उनके तेज और स्पष्ट विचारों को देखकर उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया। 1984 में बसपा बनने के बाद पहली बार मायावती को कैराना लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, हालांकि उन्हें हार मिली। इसके बाद 1985 में बिजनौर और 1987 में हरिद्वार से भी चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
1989 से बदली किस्मत
1989 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर सीट से मायावती ने बड़ी जीत दर्ज की। इसके बाद 1994 में भी वे लोकसभा पहुंचीं और उसी साल राज्यसभा सांसद भी बनीं। 1995 में मायावती पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं। वह न सिर्फ उत्तर प्रदेश की सबसे कम उम्र की महिला मुख्यमंत्री थीं, बल्कि भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री भी बनीं। 1997 और फिर 2002-03 में भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में मायावती मुख्यमंत्री बनीं। 2001 में कांशीराम ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। 2003 में पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत किया और 2007 में ऐतिहासिक जीत हासिल की। 2007 में बसपा ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं। यह दौर बसपा और मायावती दोनों के लिए सबसे मजबूत समय माना जाता है। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने सत्ता संभाली और इसके बाद बसपा का ग्राफ गिरता चला गया। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा सिर्फ एक सीट जीत पाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। फिलहाल बसपा का संसद में कोई सांसद नहीं है और यूपी में सिर्फ एक विधायक है।





