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Sunday, April 5, 2026
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Rajasthan Election 2023: राजस्थान में फिर से पायलट के साथ हो जाएगा ‘जादू’, चुनाव समिति के गठन से किसका फायदा?

Rajasthan Election 2023: कांग्रेस की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश चुनाव समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। समझिए इसके क्या हैं राजनीतिक मायने?

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज डेस्क। Gehlot vs Pilot Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 29 सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति का गठन किया है। इस समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट इस समिति में शामिल हैं। इस समिति में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों को सीएम अशोक गहलोत के समर्थकों से कम प्राथमिकता दी गई है।

पार्टी अध्यक्ष खरगे ने दी मंजूरी

कांग्रेस की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश चुनाव समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पार्टी नेता रघुवीर मीणा, रघु शर्मा, प्रताप सिंह काचरियावास, रामेश्वर डूडी, हरीश चौधरी, मोहन प्रकाश और लालचंद कटारिया इस समिति का हिस्सा हैं।

दिल्ली में हुई बैठक के बाद फैसला

इस समिति का गठन खड़गे, राहुल गांधी, कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा, डोटासरा, सचिन पायलट और राज्य के कई अन्य विधायकों और मंत्रियों के साथ छह जुलाई को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में एक चुनावी रणनीति बैठक में भाग लेने के कुछ दिनों बाद किया गया। बता दें कि इस पैनल में गहलोत सरकार के 16 मंत्रियों को शामिल किया गया है। बता दें कि इनमें से गहलोत समर्थक आठ और पायलट खेमे के सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं और अन्य छह मंत्री किसी भी खेमे में नहीं हैं। बता दें कि गहलोत के सबसे खास माने जाने वाले दो मंत्रियों महेश जोशी और शांति धारिवाल को इस समिति में शामिल नहीं किया गया है . 

पैनल में गहलोत के वफादारों का दबदबा ? 

राजस्थान में कांग्रेस चुनाव समिति का अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा होंगे, जबकि पैनल में सभी जातियों, समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। इस समिति में कई मंत्रियों को सदस्य नियुक्त किया गया है लेकिन गहलोत के वफादार इसमें हावी दिख रहे हैं। कृषि विपणन राज्य मंत्री मुरारी लाल मीणा एकमात्र पायलट के प्रमुख समर्थक हैं, जिन्हें समिति में जगह मिली है।

आम सहमति बनाने की कोशिश

इस पैनल में न तो गहलोत और न ही पायलट को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने और महत्वपूर्ण सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन करने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन गहलोत समर्थक नेताओं को चुनाव समिति में शामिल किया गया है।

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