नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की AI-171 फ्लाइट दुर्घटना को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने इस गंभीर हादसे को केवल “पायलट की गलती” करार देने को दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना” बताया। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस प्रकार की रिपोर्टें, जिनमें पायलट पर जानबूझकर ईंधन सप्लाई बंद करने का आरोप लगाया गया है, बेहद चिंताजनक हैं। अदालत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग पर विचार करते हुए केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही और हादसे के कारणों को सही ढंग से सामने नहीं लाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पायलटों को लेकर छपी रिपोर्ट पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने विमान हादसे को लेकर मीडिया रिपोर्टिंग पर गंभीर चिंता जताई है। यह टिप्पणी उस वक्त आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जांच रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सरकार को सौंपे जाने से पहले ही एक लेख प्रकाशित कर दिया, जिसमें पायलटों को दुर्घटना के लिए दोषी ठहराया गया था। प्रशांत भूषण ने कहा कि यह रिपोर्ट सूत्रों के हवाले से छापी गई और इसके बाद “पायलट की गलती” की थ्योरी मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में तेजी से फैलने लगी, जबकि कैप्टन सुमीत सबरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर दोनों बेहद अनुभवी पायलट थे।
रिपोर्ट में कॉकपिट ऑडियो का हवाला भी दिया गया, जिसमें एक पायलट कहते सुने गए “तुमने इसे कट क्यों किया?” दूसरे पायलट का जवाब था “मैंने नहीं किया।” इसी संवाद को आधार बनाकर यह अटकलें लगाई गईं कि ईंधन की सप्लाई बंद होने की घटना जानबूझकर की गई हो सकती है। जिसके लिए पायलटों को दोषी माना गया।
हादसे में 260 लोगों की हुई थी मौत
12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 19 जमीन पर मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कोर्ट-निगरानी वाली स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि हादसे को 100 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन अब तक सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट जारी हुई है। उन्होंने कहा कि आज तक न कोई फाइनल रिपोर्ट आई, न ही कोई गाइडलाइन जारी हुई है। उन्होंने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जांच स्वतंत्र विशेषज्ञों से कराने और डेटा सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रशांत भूषण ने दलील दी कि जांच टीम में DGCA के तीन मौजूदा अधिकारी शामिल हैं, जबकि DGCA की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि बोइंग 787 में उड़ान भर रहे यात्री आज भी खतरे में हैं। भूषण ने यह भी बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट की एक लाइन, जिसमें ‘पायलट एरर’ का जिक्र था, उसको अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जल्दबाजी में फैला दिया, जबकि हादसे में पायलट और चालक दल के सभी सदस्य मारे जा चुके हैं। ऐसे में गोपनीयता की दलील उचित नहीं है।
एयर इंडिया हादसे पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया क्रैश केस में अटकलों से बचने की सख्त चेतावनी दी है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है, लेकिन फ्लाइट डेटा जैसी अति-विस्तृत जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की “अगर डेटा रिकॉर्ड सार्वजनिक हो गया तो लोग अपने पॉडकास्ट रूम में बैठकर तरह-तरह के थ्योरी गढ़ने लगेंगे। अगर कोई गैर-जिम्मेदारी से कह दे कि पायलट की गलती थी और बाद में रिपोर्ट उन्हें क्लीन चिट दे दे, तो उस परिवार पर क्या बीतेगी?” इस पर याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने जवाब दिया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में विमान की खामियों की ओर संकेत था, जिसे DGCA ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग दोहराई। सुप्रीम कोर्ट ने अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA को नोटिस जारी करते हुए उनसे इस PIL पर जवाब मांगा है।





