नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कर्नाटक कांग्रेस में जारी कलह के बीच भाजपा सतर्क नजर आ रही है। राज्य के पूर्व मंत्री और विधायक रमेश जिरकिहोली ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस सरकार को गिराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भाजपा में शामिल होते हैं, तो भाजपा को अन्य विकल्पों पर विचार करना होगा। बताया जा रहा है कि शिवकुमार के समर्थक विधायक कांग्रेस आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रमेश जिरकिहोली ने कहा कि वे भाजपा नेतृत्व से न्यूट्रल रहने की अपील करते हैं और इस मुद्दे में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पावर शेयरिंग को लेकर नेताओं के बीच भ्रम है और कुछ नेता सीएम को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि नेताओं को अपनी इच्छा अनुसार काम करने दें और भाजपा को अगले चुनावों का इंतजार करना चाहिए। रमेश जिरकिहोली ने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास अभी जनादेश है और उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाना चाहिए। बार-बार चुनाव राज्य के लिए लाभकारी नहीं हैं। साथ ही उन्होंने चेताया कि अगर कांग्रेस अगले ढाई साल तक जन विरोधी नीतियों के साथ रही, तो जनता की नाराजगी भाजपा के पक्ष में जाएगी।
रमेश जिरकिहोली का बयान
जब रमेश जिरकिहोली से पूछा गया कि क्या उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पार्टी बदलकर भाजपा का समर्थन कर सरकार बना सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसकी संभावना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया “अगर ऐसा हुआ भी, तो मैं उन्हें अपने नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पाऊंगा। यह इस जीवन में संभव नहीं है। शिवकुमार भाजपा में आए तो मुझे अन्य राजनीतिक रास्तों पर विचार करना होगा।” रमेश जिरकिहोली ने आगे कहा कि उनका मानना है कि शिवकुमार के पास कांग्रेस में पर्याप्त विधायक समर्थन नहीं है। अगर ऐसा होता, तो वह पहले ही मुख्यमंत्री बन चुके होते।
शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली पहुंचे
सूत्रों के अनुसार, डीके शिवकुमार के समर्थन में खड़े विधायकों का एक और समूह कांग्रेस आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचा है। बताया गया है कि कम से कम छह विधायक रविवार रात राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। इसके अलावा, कुछ और विधायकों के भी जल्द ही दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि वे शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग रख सकें।
इस बीच, सिद्धारमैया ने संवाददाताओं से कहा कि वे आलाकमान के फैसले का पूरी तरह पालन करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर आलाकमान तय करता है कि मुझे मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए, तो मैं पद पर बना रहूंगा। जो भी फैसला होगा, मैं उसे स्वीकार करूंगा और शिवकुमार को भी इसे मानना चाहिए।”




