नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बंगाल के लगभग 32,000 प्राइमरी स्कूल शिक्षकों को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 2023 में हुई शिक्षक भर्ती से जुड़े पुराने फैसले को पलटते हुए इन शिक्षकों की नियुक्तियां बहाल करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों शिक्षकों को अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर मिली अनिश्चितता खत्म हुई है और वे अब अपने पद पर लौट सकेंगे। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में खामियों के कारण शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश किया रद्द
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिनमें जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतब्रतकुमार मित्रा शामिल हैं, उन्होंने पहले जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की सिंगल बेंच के फैसले को खारिज कर दिया। सिंगल बेंच के आदेश में 32,000 प्राथमिक स्कूल शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने का निर्देश दिया गया था। अब डिवीजन बेंच के फैसले के बाद ये शिक्षकों की नियुक्तियां बहाल कर दी गई हैं।
ब्रात्या बासू ने प्राइमरी टीचर्स को दी बधाई
पश्चिम बंगाल के हायर एजुकेशन मिनिस्टर ब्रात्या बासू ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्राइमरी स्कूल शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 2023 में दिए गए पुराने आदेश को पलट दिया और अब 32,000 प्राइमरी शिक्षकों की नौकरियां सुरक्षित हो गई हैं। ब्रात्या बासू ने कहा कि यह फैसला प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड और शिक्षकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसे सत्य की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को उनके धैर्य और मेहनत के लिए भी बधाई दी।
गौरतलब है कि 12 मई 2023 को तत्कालीन जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते 32,000 प्राइमरी स्कूल शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ, जिसमें कम रैंक वाले कई उम्मीदवारों को पैसे देकर नौकरी दी गई और कई नियुक्तियां बिना उचित साक्षात्कार या अपर्याप्त प्रशिक्षण वाले उम्मीदवारों को दी गई थीं।





