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Thursday, April 2, 2026
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केस बनाओ और अरेस्ट करो… पूर्व DGP पर गंभीर आरोप, फडणवीस-शिंदे को ULC घोटाले में फंसाने की साजिश का खुलासा

महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल मचाने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल मचाने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन DGP संजय पांडे ने देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को ULC घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की साजिश रची थी। यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है, जिसके बाद सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, संजय पांडे ने ठाणे के डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिया था कि वे 2016 के ULC केस में फडणवीस और शिंदे को आरोपी बनाएं और यह दिखाएं कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है। इतना ही नहीं, एसीपी सरदार पाटिल पर दोनों नेताओं को गिरफ्तार करने का दबाव भी बनाया गया था। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक ऑडियो क्लिप सौंपी है। दावा किया जा रहा है कि इस ऑडियो में संजय पांडे, लक्ष्मीकांत पाटिल और सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने की बातचीत सुनाई देती है। यह ऑडियो क्लिप पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।

पूछताछ में दबाव बनाने का आरोप

रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन के केस CR No. 176/2021 का भी जिक्र है। आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने संजय पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस केस के जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह फडणवीस द्वारा बिल्डरों से वसूली गई रकम के बारे में बयान दे। रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि यह पूरी घटना पुलिस तंत्र के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दुरुपयोग को दिखाती है। इससे राज्य में कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

क्या है ULC घोटाला?

ULC यानी अर्बन लैंड सीलिंग स्कैम महाराष्ट्र का बड़ा जमीन घोटाला है, जो शहरी भूमि सीलिंग कानून, 1976 से जुड़ा है। इस कानून के तहत 500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाती थी, ताकि सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन का सही प्रबंधन हो सके। लेकिन भ्रष्टाचार के चलते जमीन मालिकों ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर अपनी जमीन सरकार से बचा ली। गलत तरीके से प्रमाणपत्र जारी किए गए और करोड़ों रुपये की जमीन को अवैध रूप से सुरक्षित कर लिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले को अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक बताया है। कोर्ट ने इसमें सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई है। पुलिस ने इस केस में कई गिरफ्तारियां की हैं और जांच अभी जारी है।

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