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Monday, March 2, 2026
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Chandra Grahan 2025: इस बार पितृ पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, जानिए कब से शुरू होगा सूतक काल….

साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण इस बार जल्द लगनेवाला है जो कि, इस बार ज्योत‍िषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार का ग्रहण काल 12 घंटे पहले का होनेवाला है। जाने कब लगेगा ये ग्रहण और सूतक काल ।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2025 का दूसरा और महत्वपूर्ण चंद्र ग्रहण सितंबर महीने में लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि यह ग्रहण भाद्रपद मास की पूर्णिमा को लगेगा, जिस दिन से श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) की भी शुरुआत होती है। ऐसे में यह चंद्र ग्रहण न सिर्फ खगोलीय दृष्टि से बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइए जानते है कब लगेगा ये चंद्र ग्रहण?

कब लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें तिथि और समय

वर्ष 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात को लगेगा और यह देर रात तक चलेगा। इस खगोलीय घटना को भारत सहित कई देशों में साफ-साफ देखा जा सकेगा। 

 ग्रहण प्रारंभ – 7 सितंबर 2025, रात 09:27 बजे

 ग्रहण समाप्ति – 8 सितंबर 2025, रात 01:26 बजे

 ग्रहण की कुल अवधि – लगभग 4 घंटे

इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा और यह पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

 सूतक काल: कब से प्रभावी होगा?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब कोई ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तो उसका सूतक काल मान्य होता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृष्टिगोचर होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी प्रभावी रहेगा।

 सूतक काल प्रारंभ – 7 सितंबर 2025, दोपहर 12:57 बजे

 सूतक काल समाप्त – 8 सितंबर 2025, रात 01:26 बजे ग्रहण समाप्ति के साथ। 

सूतक काल के दौरान धार्मिक कार्य जैसे पूजा-पाठ, भोजन बनाना या खाना वर्जित माना जाता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

 कहाँ-कहाँ दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दृश्यमान होगा। इसके अलावा इसे निम्नलिखित देशों में भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा इसे चीन, रूस, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका और अरब देशों में भी साफ तौर पर देखा जा सकेगा। 

 पितृ पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण: क्या है विशेष महत्व?

इस बार यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को लग रहा है, जो कि श्राद्ध पक्ष की शुरुआत का दिन होता है। ऐसे में इसे पितृ दोष निवारण और पूर्वजों की शांति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ध्यान, जाप और दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

 क्या होता है चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और तीनों एक सीधी रेखा में होते हैं। ऐसे में सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसे ही खगोलीय भाषा में चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

 ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

 क्या करें

भगवान का स्मरण, मंत्र जाप

तुलसी के पत्ते भोजन में डालकर सुरक्षित रखें

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर पवित्र जल का छिड़काव करें। 

क्या न करें

भोजन बनाना या खाना

मंदिर में पूजा-पाठ

कोई शुभ कार्य या नया कार्य आरंभ

 राशियों पर प्रभाव और ज्योतिषीय दृष्टिकोण

कोई शुभ कार्य या नया कार्य आरंभ

 राशियों पर प्रभाव और ज्योतिषीय दृष्टिकोण

7 सितंबर 2025 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में इसकी सही जानकारी और सावधानी से हम नकारात्मक प्रभावों को टाल सकते हैं और शुभ फल की प्राप्ति कर सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि यह ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा और इसका प्रभाव विशेष रूप से कुंभ, सिंह, वृषभ, तुला और वृश्चिक राशि पर पड़ेगा। आइए जानें सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव होगा और कौन से उपाय करने से होगा लाभ।

 मेष 

प्रभाव: मानसिक अशांति और काम में रुकावटें संभव हैं।

उपाय: गाय को गुड़ और रोटी खिलाएं। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

 वृषभ 

प्रभाव: धन हानि की संभावना है, निवेश में सतर्क रहें।

उपाय: काले तिल का दान करें और माता लक्ष्मी का पूजन करें।

मिथुन 

प्रभाव: स्वास्थ्य में सुधार होगा, पुराने काम पूरे हो सकते हैं।

उपाय: तुलसी में दीपक जलाएं और पितरों को जल अर्पित करें।

 कर्क 

प्रभाव: पारिवारिक कलह से बचें, संयम से कार्य करें।

उपाय: चंद्रमा को कच्चे दूध का अर्घ्य दें।

 सिंह 

प्रभाव: करियर और प्रतिष्ठा पर ग्रहण का प्रभाव संभव।

उपाय: पितरों के नाम पर ब्राह्मण को भोजन कराएं।

कन्या 

प्रभाव: यात्रा से लाभ, संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।

उपाय: चावल और सफेद वस्त्र का दान करें।

तुला 

प्रभाव: मानसिक तनाव बढ़ सकता है, वाणी पर नियंत्रण रखें।

उपाय: चंद्रमा बीज मंत्र का जाप करें – “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”

 वृश्चिक 

प्रभाव: वैवाहिक जीवन में तनाव संभव है, धैर्य से काम लें।

उपाय: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

 धनु 

प्रभाव: रुके हुए कार्यों में गति आएगी, नई योजनाओं का लाभ होगा।

उपाय: पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।

 मकर 

प्रभाव: कार्यक्षेत्र में लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि।

उपाय: गरीबों को अन्न व वस्त्र का दान करें।

 कुंभ 

प्रभाव: स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति दोनों पर असर हो सकता है।

उपाय: ‘ॐ पितृ देवताभ्यो नमः’ का जाप करें और पितरों को जल अर्पित करें।

 मीन 

प्रभाव: मित्रों से सहयोग मिलेगा, लाभ के संकेत।

उपाय: चावल, दूध और मिश्री का दान करें।

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