नई दिल्ली रफ़्तार डेस्क। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि की शुरुआत आज यानि 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर होगी। जो अगले दिन यानी 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर समापन होगा । ऐसे में वट सावित्री का व्रत 26 मई को रखा जाएगा।
वट सावित्री व्रत पर ध्यान योग्य बातें
नहा धोकर साफ वस्त्र पहनेंइसके बाद व्रतधारी महिलाएं सूर्योदय से पहले लाल या पीले रंग के वस्त्र पहन व्रत का संकल्प लेकर निर्जला व्रत रखें।
इस दिन बिना अन्न और जल के व्रत रखें हां लेंकिन शारीरिक स्वास्थ्य को देखते हुए जरुरी हो तो जल ग्रहण कर सकती हैं.
सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें
पूजा के बाद बरगद पेड़ के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा सुननी चाहिए। इसमें पति-पत्नी के प्रेम निष्ठा की मिसाल है।
वट वृक्ष की पूजा करेंवट वृक्ष को जल अर्पित कर हल्दी-कुमकुम से पूजन करें, फिर कच्चा सूत या रेशमी धागा वृक्ष के चारों ओर घूमकर सात या ग्यारह बार लपेटते हुए परिक्रमा करें।
सत्यव्रत का पालन करें
व्रत के दिन सत्य बोलना, व गुस्से से बचना चाहिए साथ ही पुण्य कार्यों में भाग लेना शुभ माना जाता है। इस दिन किसी से किसी भी प्रकार का झूठ न बोलें। क्योंकि यह व्रत सत्य की शक्ति पर ही आधारित है.बाल न धोएं या कटवाएं इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को बाल धोने या कटवाने से बचना चाहिए। यह अच्छा नही माना जाता है।विवाद या कलह से बचें इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को किसी से भी झगड़ा या तकरार नहीं करनी चाहिए। फिर चाहे जो परिस्थिती उत्पन हो।
इन मंत्रों का करें जाप
“अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।”
“पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।”
“यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।”
“तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।”
“यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।”
“तानि सर्वानि वीनश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।”





