नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जल्द ही पटना के मशहूर 10 सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास को खाली करना होगा। भवन निर्माण विभाग की ओर से इसके लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। हालांकि राबड़ी देवी को नया सरकारी आवास 39 हार्डिंग रोड पर दे दिया गया है। इस खबर के सामने आते ही सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतने वर्षों बाद यह निर्णय क्यों?
क्यों खास है 10 सर्कुलर रोड?
राबड़ी देवी चाहे सत्ता में रही हों या विपक्ष में 10 सर्कुलर आवास पिछले दो दशक से उनके नाम पर ही आवंटित रहा है। 2005 में जब लालू परिवार सत्ता से बाहर हुआ, तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग छोड़ना पड़ा और तब राबड़ी देवी को पूर्व सीएम होने के नाते यह बंगला मिला। इसके बाद से परिवार यहीं रह रहा है। सबसे दिलचस्प बात इतने वर्षों में नीतीश कुमार ने कभी इस बंगले को लेकर सवाल नहीं उठाया। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं।
BJP की बड़ी जीत से बदला समीकरण?
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार के फैसलों पर अब बीजेपी का ज्यादा प्रभाव दिख रहा है और राबड़ी आवास खाली कराने का आदेश राजनीतिक संकेत भी हो सकता है। इस फैसले की जड़ 2017 की राजनीतिक उथल-पुथल में है। जब BJP फिर सत्ता में आई थी तो तेजस्वी यादव को उनका आवास खाली करने का आदेश दिया गया। तेजस्वी कोर्ट गए, लेकिन राहत नहीं मिली। पटना हाई कोर्ट ने 2019 में बड़ा फैसला दिया पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर रोक हालांकि उस वक्त राबड़ी देवी विपक्ष की नेता थीं, इसलिए उनका आवास बच गया था। लेकिन अब विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष होते हुए भी उन्हें नया आवास दिया जा चुका है और पुराना घर छोड़ना ही होगा।
BJP का तंज -“नल-टोटी मत चोरी करना”
नोटिस जारी होते ही राजनीति और गरमा गई। BJP के प्रवक्ता नीरज कुमार ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा,“इस बार घर खाली करते समय सरकारी संपत्ति की चोरी नहीं करना! नल-टोटी मत निकाल लेना ट्रैक रिकॉर्ड खराब है, नजर रखेंगे। उनकी यह टिप्पणी लालू परिवार की पुरानी राजनीतिक छींटाकशी को फिर गर्मा गई है।





