नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क । रंगपंचमी का त्योहार हर साल होली के 5 दिन बाद फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार रंग पंचमी 19 मार्च को धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग परम्पराओं के अनुसार मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार रंगपंचमी तिथि 18 मार्च को रात 10 बजकर 09 मिनट बजे शुरू होगी और 20 मार्च को रात 12 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी।
होली और रंग पंचमी दोनों ही रंगों से जुड़े त्योहार हैं, लेकिन इनका महत्व अलग है। होली पर लोग एक-दूसरे पर रंग-गुलाल लगाकर प्यार और भाईचारा बढ़ाते हैं। रंग पंचमी पर रंगों से देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। आसमान में उड़ाए गए रंगों से देवता खुश होते हैं और अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। रंग पंचमी का त्योहार मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र यानी मथुरा, वृंदावन और बरसाने में प्रमुख रूप से मनाया जाता है। इसे श्रीपंचमी, लक्ष्मी पंचमी और देव पंचमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी स्वरूपा राधाजी की प्रतिमा पर लाल रंग गुलाल चढ़ाने से आपको मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
रंगपंचमी का ये है शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04.51 बजे से शाम 5.38 बजे तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02.30 बजे से 03.54 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 6.29 से 6.54 तक
जानिए रंग पंचमी का महत्व
ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी देवी-देवताओं की आराधना का त्योहार है। रंग पंचमी पर गुलाल को हवा में उछालकर देवताओं को अर्पित किया जाता है। इससे देवता प्रसन्न होते हैं और कृपा बरसाते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली मनाई थी। स्वर्ग से देवी-देवता भी इस दिन फूलों की वर्षा करते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर अबीर-गुलाल उड़ाने की परंपरा है।





