नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दिल्ली धमाके की जांच अब एनआईए के अनुभवी अधिकारियों को सौंपी गई है, जो 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी शामिल थे। साजिश की तह तक पहुँचने के लिए करीब 50 अधिकारी तैनात किए गए हैं, जिन्हें 10-10 सदस्यों वाली 10 विशेष टीमों में विभाजित किया गया है।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) हर दिशा में छानबीन कर रही है। बुधवार, 12 नवंबर को जम्मू-कश्मीर की पूर्व आईपीएस शाहिदा परवीन गांगुली घटनास्थल पर पहुंचीं, जिसे जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की पहली महिला आईपीएस और SOG सदस्य, शाहिदा परवीन गांगुली, लेडी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जानी जाती हैं। 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने आतंकवाद के कई बड़े ऑपरेशन नेतृत्व किए। कश्मीर के मुस्लिम परिवार में जन्मी शाहिदा ने शादी के बाद बंगाली सरनेम गांगुली अपनाया।
कौन हैं शाहिदा परवीन गांगुली
1997 बैच की आईपीएस अधिकारी शाहिदा परवीन 1997-2002 तक SOG की एलीट यूनिट में रहीं, जो सीधे आतंकवादियों से टकराती है। 1999 में एक बड़े ऑपरेशन में उन्होंने घात लगाए हमले नाकाम किए और कई आतंकवादियों को ढेर किया। इस साहस के लिए उन्हें गैलंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कई हाई-प्रोफाइल आतंकी मामलों की जांच
एसओजी के बाद शाहिदा परवीन ने सीआईडी में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर काम करते हुए कई हाई-प्रोफाइल आतंकी मामलों की जांच की। 2000 में उन्होंने पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के कई बड़े मॉड्यूल ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम पर जागरूकता अभियान भी चलाए।
बता दें कि, दो बच्चों की मां शाहिदा परवीन वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं। उनके कई एनकाउंटर को लेकर मानवाधिकार समूहों ने सवाल उठाए, लेकिन अधिकतर मामलों में उन्हें कोर्ट से क्लीन चिट मिली है।
अब तक इन मामलों में जांच कर चुका है एनआईए
एनआईए बनने के बाद देशभर की बड़ी आतंकी घटनाओं की जांच की है। इसमें पुलवामा और मुंबई आतंकी हमले, मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ ब्लास्ट, आतंकी अबू जिंदाल और यासीन भटकल की गिरफ्तारी, हैदराबाद ब्लास्ट, केरल लव जिहाद मामला सहित कई प्रमुख मामले शामिल हैं।





