नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। साल का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई को लगने जा रहा है। इस दिन वैशाख पूर्णिमा और बुध पूर्णिमा भी माना जाएगा। चंद्र ग्रहण 5 मई की रात को 8 बजकर 46 मिनट से शुरू होगा और मध्यरात्रि के बाद 1 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण का अपना एक विशेष महत्व होता है लेकिन, धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य करने के लिए मना किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं।
चंद्र ग्रहण के समय करें ये काम
चंद्र ग्रहण के समय में व्यक्ति को भगवान का ध्यान लगाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में मंत्रों का जाप करना चाहिए। चंद्र ग्रहण के समय विष्णु चालीसा का पाठ करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। ग्रहण खत्म होने के बाद अच्छे से नहा धोकर शुद्धिकरण करना चाहिए। नहाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल जरूर मिला लें। जिस किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र ग्रहण दोष हो तो वो व्यक्ति ग्रहण के बाद चावल सफेद वस्तु का दान जरूर करें। सफेद वस्त्र जैसे दूध, दही, चावल का दान करने से आपकी कुंडली से चंद्र ग्रहण दोष समाप्त हो जाएगा।
चंद्र ग्रहण के समय ना करें ये काम
ग्रहण काल में किसी भी तरह का शुभ कार्य करने से बचना चाहिए । यदि आप ग्रहण काल में काई काम करते हैं तो कोई फल आपको प्राप्त नहीं होता है। ग्रहण काल में कुछ भी खाने-पीने से परहेज करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय अपना विशेष ख्याल रखें । चंद्र ग्रहण के समय चंद्र की ओर नहीं देखना चाहिए यदि गलती से भी आपकी नजर चंद्रमा पर पड़ जाती है, तो ये आपके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इस समय कैंची चाकू जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल ना करें।ग्रहण काल के दौरान भगवान की मूर्ति स्पर्श नहीं करनी चाहिए।





