back to top
28.1 C
New Delhi
Wednesday, March 4, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

इस सोमवार पर बन रहा दुर्लभ संयोग, शिव पूजा से मिलेगा 1000 महाशिवरात्रि व्रतों का लाभ

मार्गशीर्ष महीना में आर्द्रा नक्षत्र का दिन शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम है। इस दिन शिव जी का व्रत और पूजन करने से एक हजार महाशिवरात्रि का पुण्य प्राप्त होता है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । मार्गशीर्ष महीना में आर्द्रा नक्षत्र का दिन शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम है। इस दिन शिव जी का व्रत और पूजन करने से एक हजार महाशिवरात्रि का पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन आप शिव की पूजा करके अपनी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं। शिव कृपा से आपकी मनोकामनाएं पूर्ण हों। भगवान शिव पहली बार मार्गशीर्ष माह के आर्द्रा नक्षत्र में प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। आपको बताएं कि 27 नक्षत्रों में से आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी महादेव हैं। इस दिन शिव की पूजा और दर्शन करने से व्यक्ति महादेव का प्रिय हो जाता है। 

16 दिसंबर सोमवार को शिव पूजा का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषाचार्य भरत दुबे के अनुसार इस साल 16 दिसंबर को आर्द्रा नक्षत्र और सोमवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। उस दिन शुक्ल और ब्रह्म योग बनेगा. सुबह से 11 बजकर 23 मिनट तक शुक्ल योग, उसके बाद ब्रह्म योग है। यह दिवस भगवान शिव के दीप्तिमान स्तंभ रूप में प्रकट होने का दिन है और सोमवार शिव पूजा को समर्पित दिन है। सोमवार के दिन आर्द्रा नक्षत्र का संयोग बनने से यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र के दिन भगवान शिव का पूजन और दर्शन करना चाहिए। अगर आपके पास समय है तो भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें और उनकी आरती करें। भोलेनाथ को प्रसाद चढ़ाएं, इसके बाद अपने पूजा घर या शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के लिए 11, 21, 51 या 108 घी के दीपक जलाएं। इस दिन दीपक जलाने का भी बहुत महत्व है।

मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र का महत्व

शिव पुराण की कहानी के अनुसार, भगवान विष्णु और ब्रह्मा इस बात पर बहस कर रहे थे कि उनमें से सर्वश्रेष्ठ कौन है, तभी निराकार भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में उनके सामने प्रकट हुए। उस तेजस्वी शिवलिंग का कोई ओर छोर नहीं था। दोनों को शिव की महत्ता का पता चला। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा ने पहली बार शिवलिंग की पूजा की। जो व्यक्ति इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती या शिवलिंग के दर्शन करता है, वह व्यक्ति महादेव को भगवान कार्तिकेय से भी अधिक प्रिय हो जाता है। इस दिन शिव परिवार की पूजा और भोलेनाथ का अभिषेक करने से हजारों महाशिवरात्रि पूजा के बराबर पुण्य मिलता है।

मार्गशीर्ष आर्द्रा नक्षत्र का वर्णन शिवपुराण में मिलता है-

यत्पुनः स्तंभरूपेण स्वाविरासमहं पुरा॥

स कालो मार्गशीर्षे तु स्यादार्द्रा ऋक्षमर्भकौ॥

आर्द्रायां मार्गशीर्षे तु यः पश्येन्मामुमासखम्॥

मद्बेरमपि वा लिंगं स गुहादपि मे प्रियः॥

अलं दर्शनमात्रेण फलं तस्मिन्दिने शुभे॥

अभ्यर्चनं चेदधिकं फलं वाचामगोचरम्॥

Advertisementspot_img

Also Read:

Maha Shivaratri 2026: संतान सुख की कामना है? आज महाशिवरात्रि के दिन ये काम करने से पूरी हो सकती है मनोकामना

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज महाशिवरात्रि का पर्व भगवान भोलेनाथ की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन दंपतियों...
spot_img

Latest Stories

कुछ देशों में होली पर रंग खेलने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई, जानिए कौन से हैं वो देश?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में होली सिर्फ एक त्योहार...

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण और होली का संयोग, जानें सूतक में किन कार्यों से रहें दूर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन पूर्णिमा पर जहां एक ओर...

Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जैसे ही तापमान चढ़ता है, त्वचा...

Vastu Tips: घर में शांति बनाए रखने के लिए ये वास्तु उपाय, बनने लगेंगे सारे काम

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। जीवन में सुख समृद्धि अथवा...

Iran-Israel War का भारत पर क्या होगा असर, कैसे कच्चे तेल की कीमतों को करेगा प्रभावित?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को...