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पुलिस ज्यादती के खिलाफ शिक्षक की याचिका पर कोलकाता हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

कोलकाता, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। प्राथमिक शिक्षकों के अवैध स्थानांतरण के खिलाफ लड़ रहे शिक्षक ओक्या मंच (शिक्षक एकता मंच) के एक शिक्षक और नेताओं में से एक मोइदुल इस्लाम ने पुलिस की मनमानी के खिलाफ कोलकाता उच्च न्यायालय में शिकायत की है। इस्लाम ने कहा कि गुरुवार रात उत्तरी कोलकाता के बेलियाघाट में उनके घर के सामने बड़ी संख्या में पुलिस जमा हो गई और उन्हें थाने जाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। घटना की जानकारी न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा के संज्ञान में लाई गई, जिन्होंने तुरंत शिक्षक का मामला दर्ज करने को कहा और कहा कि यदि संभव हो तो शुक्रवार को ही मामले की सुनवाई की जाएगी। यह घटना पुलिस और ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ी शमिर्ंदगी साबित हो रही है। आधी रात के आसपास, कोलकाता पुलिस की 200 सदस्यीय एक मजबूत इकाई ने मोइदुल इस्लाम के आवास को घेर लिया और उसे अपने साथ पुलिस के पास जाने को कहा। इस्लाम जो विधानसभा चुनाव में भारतीय सेक्युलर फ्रंट के उम्मीदवार भी थे, उन्होंने रात में जाने से इनकार कर दिया और आश्वासन दिया कि वह सुबह पुलिस स्टेशन में होंगे। इस्लाम ने कहा कि मैं एक शिक्षक हूं और वे मुझे थाने ले जाने के लिए आधी रात को आए हैं। वे मुझे नोटिस भेज सकते थे। मैं असामाजिक नहीं हूं। कोई कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। वे मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे कि मैं एक अपराधी था। हालांकि, लगभग तीन घंटे के बाद पुलिस मौके से चली गई और इस्लाम ने अदालत जाने का फैसला किया। शिशु शिक्षा केंद्र (प्राथमिक विद्यालय) के पांच संविदा शिक्षकों ने अपने घरों से दूर स्थानों पर स्थानांतरण का विरोध करते हुए मंगलवार शाम राज्य के शिक्षा विभाग – विकास भवन के सामने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। सभी महिला शिक्षकों को एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां दो की हालत गंभीर बताई गई। मंगलवार की घटना तब हुई जब शिशु शिक्षा केंद्र के कुछ संविदा शिक्षक अपने घरों से करीब 600 से 700 किलोमीटर दूर दूर के इलाकों में अपने कथित स्थानांतरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। पुलिस ने आकर आंदोलनकारी शिक्षकों को हटाने का प्रयास किया तो पांच महिला शिक्षिकाओं ने जहर की बोतल निकालकर सामग्री को निगल लिया। पुलिस के सूत्रों ने दावा किया कि इस्लाम इन शिक्षक संगठन का नेता है और विशिष्ट शिकायत है कि उसने शिक्षकों को जहर खाने के लिए उकसाया और जांच के लिए उससे पूछताछ बहुत महत्वपूर्ण थी। हालांकि पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं था कि रात के समय इतनी बड़ी फौज ने उनके घर पर छापा क्यों मारा। राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि मोइदुल इस्लाम एक नेता हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वह एक शिक्षक हैं। इसलिए, पुलिस और राज्य सरकार से इस तरह के व्यवहार की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि हालांकि, कोई इस सरकार से कुछ भी उम्मीद कर सकता है। वे निरंकुश व्यवहार कर रहे हैं। उनके पास न तो कानून के लिए कोई सम्मान है और न ही इस राज्य के लोगों के लिए। इस पार्टी से इसी तरह की उम्मीदें है। –आईएएनएस एमएसबी/आरजेएस

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