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Thursday, March 19, 2026
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‘जब तक जुल्म होगा, तब तक जिहाद…’ बिफरे मौलाना मदनी, कहा-SC को सुप्रीम कहलाने का अधिकार नहीं

मौलाना मदनी ने सुप्रीम कोर्ट और सरकार पर आरोप लगाते हुए बाबरी और तीन तलाक फैसलों को अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बताया और कहा कि जिहाद असली भलाई के लिए होता है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रमुख धार्मिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में एक सार्वजनिक सभा के दौरान न्यायपालिका और सरकार पर सीधे और तीखे आरोप लगाकर देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने हालिया फैसलों, विशेष रूप से बाबरी मस्जिद और तीन तलाक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि,अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं।

न्यायपालिका पर गंभीर आरोप

मौलाना मदनी ने अदालतों के कई फैसलों को संविधान में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।मदनी ने 1991 के Places of Worship Act (उपासना स्थल अधिनियम) के बावजूद हुई कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट को तभी तक सुप्रीम कहा जा सकता है, जब तक वहां संविधान सुरक्षित है, अगर ऐसा नहीं होता तो वह इस नाम का हकदार नहीं रह जाता। उनका कहना है कि बाबरी और तलाक जैसे विवादित मामलों के फैसलों से यह प्रतीत होता है कि अदालतें संवैधानिक अधिकारों के बजाय बाहरी दबाव में हैं।

 जिहाद पर विवादास्पद टिप्पणी

मदनी ने ‘जिहाद’ शब्द पर विवादित टिप्पणी करते हुए उसे सरकार और मीडिया द्वारा बदनाम करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा, जहाँ जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा। उन्होंने दावा किया कि असली जिहाद हमेशा दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए रहा है, जबकि मीडिया इसे लव जिहाद, थूक जिहाद या जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़कर पेश कर रहा है।हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है, जहाँ मुसलमान संविधान के प्रति वफादार हैं और यहाँ किसी जिहाद की बहस की जरूरत नहीं है।

 वंदे मातरम और समाज संवाद

मौलाना मदनी ने ‘वंदे मातरम’ जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों और समुदाय के रवैये पर भी कड़ी टिप्पणी की।उन्होंने कहा कि जो समुदाय मुर्दा कौम की तरह होता है, यानी भय और दबाव में जी रहा होता है, वह आसानी से सरेंडर कर देगा और वंदे मातरम बोलने लगेगा। उन्होंने इस रवैये को मुर्दा कौम की पहचान बताया। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे देश के 60% खामोश वर्ग से संवाद करें, क्योंकि अगर यह वर्ग अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो गया, तो देश में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। मौलाना मदनी के ये बयान, न्यायपालिका और ‘जिहाद’ को लेकर उनकी तीखी आलोचना, ऐसे समय में आई है जब देश में धार्मिक-सामाजिक विवाद और ऐतिहासिक फैसलों पर तीखी राजनीति हो रही है। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है।

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