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रिसर्च के लिए उद्योग व फंडिंग एजेंसियों के साथ नेटवर्किं ग करेगा बीएचयू

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू ) रिसर्च के लिए उद्योग व फंडिंग एजेंसियों के साथ नेटवर्किं ग करेगा। इस पहल के तहत बीएचयू ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करेगा, जिनमें विश्वविद्यालय-उद्योग शोध सहयोग, परामर्श और आउटरीच की संभावना हो। उद्योग तथा फंडिंग एजेंसियों के साथ नेटवर्किं ग के जरिए बीएचयू के फैकेल्टी मेंबर्स को वित्तीय सहायता के अवसरों के बारे में जानकारी प्रदान हो सकेगी। इस पूरी परियोजना के लिए बीएचयू ने शोध सृजनात्मकता ने प्रायोजित शोध और औद्योगिक परामर्श प्रकोष्ठ की स्थापना की है। इस प्रकोष्ठ का उद्देश्य विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा देना है। प्रकोष्ठ की अन्य महत्वपूर्ण जि़म्मेदारियों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और विभिन्न मंचों पर विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना है। रिसर्च को बढ़ावा देने वाला यह प्रकोष्ठ परियोजना से संबंधित समझौतों को संसाधित व प्रबंधित भी करेगा। प्रकोष्ठ के कार्यों में परियोजना स्टाफ पोस्ट-डॉक्टरल फेलो की नियुक्ति की प्रक्रिया संबंधी कार्य भी शामिल हैं। इसके साथ ही इसके अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए शोध एवं विकास गतिविधियों, पुरस्कारों तथा फेलोशिप के अवसर सृजित करना, बौद्धिक सम्पदा परिसंपत्तियों (पेटेंट, डिजाइन आदि) के निर्माण और प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना शामिल हैं। इस विषय पर विश्वविद्यालय का कहना है कि शोध सृजनात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने प्रायोजित शोध और औद्योगिक परामर्श प्रकोष्ठ की स्थापना की है। प्रकोष्ठ समस्त प्रायोजित शोध और औद्योगिक परामर्श परियोजनाओं की सम्पूर्ण कार्यावधि के समग्र प्रबंधन के लिए सिंगल विन्डो व्यवस्था होगी। परियोजना प्रस्तावों के विकास और प्रस्तुतीकरण, परियोजनाओं के निर्बाध प्रबंधन और फंडिंग एजेंसियों के साथ नेटवर्किं ग की सुविधा प्रदान करेगा। कुलपति प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन ने रसायन शास्त्र विभाग, विज्ञान संस्थान, के प्रोफेसर डी. एस. पांडे को प्रायोजित शोध और औद्योगिक परामर्श प्रकोष्ठ का आचार्य प्रभारी नियुक्त किया है। यह प्रकोष्ठ व्यापक, विषयगत तथा अंतर-विषयी परियोजना प्रस्ताव विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के दक्ष शोधकर्ताओं को चिन्हित और प्रोत्साहित करके संस्थान के भीतर अथवा अन्य संस्थानों के साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध सहयोग स्थापित करेगा। –आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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