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Thursday, April 2, 2026
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ट्विटर ने कांग्रेस और राहुल गांधी का अकाउंट किया अनलॉक

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर ने शनिवार को कांग्रेस और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ही अन्य कई लोगों का अकाउंट अनलॉक कर दिया है। ट्विटर ने उसकी नीतियों का उल्लंघन करने के कारण कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और अन्य कई लोगों के अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था। पार्टी का अकाउंट खुलने के बाद कांग्रेस ने कहा, सत्यमेव जयते। सूत्रों के मुताबिक, ट्विटर ने अकाउंट्स तो अनलॉक कर दिए हैं, लेकिन पुराने ट्वीट्स को होल्ड कर दिया है। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने नीतियों के उल्लंघन के लिए इन अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया था, जिसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार के इशारे पर ऐसा किया जा रहा है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक वीडियो बयान जारी कर उनके ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने पर कंपनी की जमकर आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि ट्विटर कंपनी देश की राजनीति में पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रही है। राहुल ने वीडियो बयान में कहा था, मेरे ट्विटर अकाउंट को बंद करके वे हमारी राजनीतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, एक कंपनी हमारी राजनीति का दायरा तय करने के लिए अपने कारोबार का उपयोग कर रही है। एक नेता के तौर पर मैं इसे पसंद नहीं करता। यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है। यह राहुल गांधी पर हमला नहीं है। उन्होंने कहा, मेरे पास 1.9 करोड़ से दो करोड़ के बीच फॉलोवर हैं। आप उन्हें अपने विचार रखने के अधिकार से वंचित कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, यह सिर्फ अनुचित ही नहीं, बल्कि उस विचार की अहवेलना है कि ट्विटर एक तटस्थ मंच है। यह निवेशकों के लिए बहुत खतरनाक है, क्योंकि राजनीतिक मुकाबले में किसी एक का पक्ष लेने पर ट्विटर के लिए प्रतिक्रियां भी होंगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, विपक्ष को संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है और मीडिया नियंत्रित है। उन्होंने कहा, मैंने सोचा था कि यह उम्मीद एक रोशनी है, जहां हम ट्विटर पर अपने विचार रख सकते थे। लेकिन यह बात नहीं है। अब यह स्पष्ट है कि ट्विटर तटस्थ एवं उद्देश्यात्मक मंच नहीं है। यह पक्षपातपूर्ण मंच है। यह वही सुनता है, जो सरकार कहती है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, भारतीय होने के नाते, हमें यह सवाल पूछना होगा : क्या हम कंपनियों को अपनी राजनीति तय करने का अधिकार दे सकते हैं, क्योंकि सरकार उसके साथ है? क्या हम अपनी राजनीति को खुद डिफाइन (परिभाषित) करना चाहते हैं? यहीं असली सवाल है। –आईएएनएस एकेके/एएनएम

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