दूषित पानी से मौतों पर फूटा सीएम का गुस्सा, इंदौर निगम में बड़ी कार्रवाई, लापरवाह अफसर को किया बर्खास्त

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नगर निगम और PHE विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की। नगर निगम आयुक्त को नोटिस, अपर आयुक्त को तत्काल हटाया गया ।

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Indore Contaminated Water CM Mohan Yadav
Indore Contaminated Water CM Mohan Yadav

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल से उपजी त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए नगर निगम और PHE विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कारण बताओ नोटिस जारी किया

मुख्यमंत्री ने नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य का प्रभार वापस लेने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तुरंत नियुक्तियों करने के आदेश भी जारी किए गए।

वरिष्ठ अधिकारियों की एक जांच समिति भी गठित की गई है

इससे पहले मुख्यमंत्री ने भागीरथपुरा में दूषित पानी से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया। संबंधित जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री PHE को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया, जबकि प्रभारी उपयंत्री PHE को सेवा से बाहर किया गया। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक जांच समिति भी गठित की गई है।

राहत और स्वास्थ्य सेवाएं युद्धस्तर पर

प्रशासन ने प्रभावित इलाके में राहत कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। भागीरथपुरा के 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है। अब तक कुल 272 मरीज भर्ती हुए, जिनमें 71 को छुट्टी मिल चुकी है। वर्तमान में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 ICU में हैं। MY अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को उत्तम चिकित्सा सुविधा निःशुल्क प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

मौत का आंकड़ा विवादित

मौतों की संख्या को लेकर असमंजस अभी भी बना हुआ है। प्रशासन ने अभी तक केवल चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की जानकारी दी। स्थानीय निवासियों का दावा है कि 6 महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की मौत हुई है।

पाइपलाइन में लीकेज और पानी दूषित

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब टेस्ट रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि पानी पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित हो गया। लीकेज का स्थान एक पुलिस चौकी के पास था, जहाँ पास में शौचालय भी मौजूद था। इस लीकेज के कारण पिछले नौ दिनों में लगभग 1400 लोग उल्टी और डायरिया से प्रभावित हुए हैं।

सीएम की स्पष्ट चेतावनी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही इंदौर नगर निगम और PHE विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकारी कार्रवाई और प्रशासनिक निगरानी

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में पानी की सप्लाई दुरुस्त करने और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया है। जांच समिति को घटना के सभी पहलुओं की तत्काल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इंदौर नगर निगम के अन्य जोनल अधिकारियों और PHE इंजीनियरों पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है।