नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हर साल 1 जनवरी को पूरी दुनिया नए साल का स्वागत करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टि से 1 जनवरी को साल का ‘0 पॉइंट’ माना जाता है? यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि समय की गणना का वह शुरुआती बिंदु है, जहां से पूरे वर्ष की गिनती शुरू होती है। इसके पीछे कैलेंडर व्यवस्था, खगोलीय गणनाएं और इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारण हैं।
गणित में किसी माप की शुरुआत शून्य से होती है।
सबसे पहला और अहम कारण यह है कि 1 जनवरी से ही हमारे मौजूदा कैलेंडर सिस्टम की शुरुआत होती है। आज पूरी दुनिया जिस ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल करती है, उसमें 1 जनवरी को वर्ष का पहला दिन तय किया गया है। वैज्ञानिक इसे 0 पॉइंट इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह साल की गणना का आरंभिक संदर्भ बिंदु होता हैठीक वैसे ही जैसे गणित में किसी माप की शुरुआत शून्य से होती है।
इसी देवता के नाम पर जनवरी (January) महीने का नाम पड़ा
इस तारीख के पीछे एक रोचक ऐतिहासिक पहलू भी जुड़ा है। प्राचीन रोम में जेनस (Janus) नाम के देवता की पूजा की जाती थी, जिन्हें शुरुआत और अंत का देवता माना जाता था। मान्यता थी कि जेनस के दो चेहरे होते हैंएक अतीत की ओर देखने वाला और दूसरा भविष्य की ओर। इसी देवता के नाम पर जनवरी (January) महीने का नाम पड़ा, जिसे नए आरंभ का प्रतीक माना गया।
कहीं मार्च से नया साल शुरू होता था
समय के साथ कैलेंडर व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने पुराने जूलियन कैलेंडर की खामियों को दूर करते हुए ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया। उस दौर में अलग-अलग देशों में अलग कैलेंडर प्रचलित थे, जिससे व्यापार, यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संवाद में भारी अव्यवस्था पैदा हो रही थी। कहीं मार्च से नया साल शुरू होता था, तो कहीं सितंबर से।
ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू होने के बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने इसे अपनाया। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि 1 जनवरी को वैश्विक स्तर पर साल का पहला दिन मान लिया गया, जिससे समय की गणना में एकरूपता आई और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में सहूलियत हुई।
एक साल कहां शुरू होता है और कहां खत्म।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी 1 जनवरी को शुरुआती बिंदु मानना बेहद जरूरी है। पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 365.25 दिन लगते हैं। इसी कारण हर चार साल में एक लीप ईयर जोड़ा जाता है। अगर साल की शुरुआत का कोई तय बिंदु न होता, तो मौसम और तारीखों का संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ जाता।
वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी भी समय-गणना के लिए एक स्पष्ट स्टार्टिंग रेफरेंस पॉइंट होना जरूरी है। इसी वजह से 1 जनवरी को साल का 0 पॉइंट माना गया, ताकि यह साफ रहे कि एक साल कहां शुरू होता है और कहां खत्म।इस तरह 1 जनवरी सिर्फ नया साल मनाने की तारीख नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और वैश्विक सहमति से तय किया गया समय का आधार बिंदु है, जिससे पूरी दुनिया की तारीखें और मौसम एक संतुलन में बने रहते हैं।





