नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सनसनीखेज ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ की मुख्य आरोपी मुस्कान ने जेल में रहते हुए एक बच्ची को जन्म दिया है। यह एक अजीब संयोग है कि बच्ची का जन्म उसके मृत पति सौरभ के जन्मदिन 24 नवंबर को हुआ है। पति की हत्या के आरोप में जेल में बंद मुस्कान को रविवार रात तबीयत बिगड़ने के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां सोमवार शाम करीब सात बजे मेडिकल कॉलेज के गायनिक वार्ड में मुस्कान ने सामान्य डिलीवरी के जरिए बेटी को जन्म दिया। हालांकि, सूचना दिए जाने के बावजूद मुस्कान या नवजात बच्ची से मिलने परिवार का कोई भी सदस्य मेडिकल नहीं पहुंचा। मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं और उनकी देखभाल जेल प्रशासन की टीम कर रही है।
क्या था ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ का मामला?
ब्रह्मपुरी के इंदिरानगर निवासी मुस्कान का अपने प्रेमी साहिल के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। उसका पति सौरभ फरवरी 2025 में लंदन से मेरठ लौटा था।3 मार्च की रात मुस्कान ने सौरभ को खाने में बेहोशी की दवा दी। बेहोश होने पर मुस्कान और साहिल ने चाकू से उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद दोनों ने सौरभ की लाश के टुकड़े किए और एक नीले ड्रम में सीमेंट डालकर जमा दिया था।18 मार्च को हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों आरोपी 19 मार्च से मेरठ जेल में बंद हैं।
बच्चे के DNA जांच की मांग
नवजात बच्ची के जन्म से पहले ही, सौरभ के परिजनों ने बच्चे के पितृत्व (Paternity) को लेकर सवाल उठाए थे और डीएनए जांच (DNA Test) की मांग की थी। सौरभ के बड़े भाई राहुल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे बच्चे को तभी स्वीकार करेंगे जब डीएनए मिलान में यह साबित होगा कि बच्चा सौरभ का ही है। चूंकि यह बच्चा एक सनसनीखेज हत्या के मामले से जुड़ा है, इसलिए अब सबकी निगाहें कोर्ट और पुलिस पर टिकी हैं कि वे राहुल की शिकायत पर डीएनए जांच की प्रक्रिया कब शुरू करते हैं। जेल प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर मुस्कान के वार्ड और आसपास के इलाके को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया है।
उपलब्ध जानकारी और जेल सूत्रों के अनुसार, साहिल की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है। हत्या के मामले में मुस्कान की तरह ही साहिल भी 19 मार्च 2025 से मेरठ जेल (चौधरी चरण सिंह कारागार) में न्यायिक हिरासत में बंद है।
जेल नियमों के अनुसार, मुस्कान (महिला बैरक में) और साहिल को अलग-अलग पुरुष बैरक में उच्च सुरक्षा के तहत रखा गया है। दोनों को एक-दूसरे से मिलने की अनुमति नहीं है।
साहिल भी मुस्कान के साथ हत्या के मुकदमे का सह-आरोपी है और इस केस की सुनवाई मेरठ जिला जज की अदालत में जारी है। साहिल की ओर से भी कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। गिरफ्तारी के शुरुआती दिनों में साहिल को नशे की लत के कारण कठिनाई हुई थी, लेकिन जेल प्रशासन की काउंसलिंग और योग कक्षाओं के माध्यम से अब वह सामान्य दिनचर्या का पालन कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी सामने आया था कि उसने जेल में खेती करने और सब्जियां उगाने की इच्छा जताई थी। वर्तमान में, वह अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें इस मामले के गवाहों (जैसे कैब चालक, मृतक के परिवार) के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
कोर्ट के पास दायर करनी होगी याचिका
सौरभ के परिजन (भाई राहुल) को डीएनए जांच की मांग करने के लिए ट्रायल कोर्ट (जहाँ हत्या का मामला चल रहा है) में एक औपचारिक याचिका दायर करनी होगी।
भारतीय कानून, विशेषकर साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) के तहत, न्यायालय के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी मामले में सच्चाई तक पहुंचने के लिए डीएनए जांच का आदेश दे सकता है, बशर्ते वह जांच मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से प्रासंगिक हो। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि,बच्चा सौरभ का है या उसके प्रेमी साहिल का, खासकर क्योंकि सौरभ के परिवार ने बच्चे को स्वीकार करने के लिए डीएनए मिलान की शर्त रखी है, जो विरासत और उत्तराधिकार के अधिकारों को भी प्रभावित करता है।
कैसे होगी DNA जांच?
चूंकि पति सौरभ मृत है, ऐसे में पितृत्व निर्धारण की प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है। कोर्ट जेल और मेडिकल कॉलेज अधिकारियों को नवजात बच्ची और मुस्कान का सैंपल लेने का आदेश जारी करेगा।
सौरभ मृत हैं, इसलिए डीएनए टेस्ट सीधे उनसे नहीं हो सकता। कोर्ट फॉरेंसिक जांच के लिए सौरभ के करीबी रिश्तेदारों (जैसे भाई राहुल या माता-पिता) के सैंपल का उपयोग करने का आदेश दे सकता है, ताकि यह साबित किया जा सके कि,बच्ची का जैविक संबंध सौरभ के परिवार से है या नहीं। यदि जांच का उद्देश्य यह साबित करना है कि,बच्चा प्रेमी साहिल का है, तो कोर्ट साहिल का भी सैंपल लेने का आदेश दे सकता है। जिसमें इस सैंपल को सरकारी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा जाएगा। FSL अपनी रिपोर्ट सीधे कोर्ट को सौंपेगी, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेगा। अदालत को जांच का आदेश देने से पहले यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इससे माँ और नवजात बच्चे की निजता और स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।





