नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पति सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या कर शव को ड्रम में सीमेंट से छिपाने के आरोप में जेल में बंद पत्नी मुस्कान को नवजात बेटी के साथ मेरठ जिला जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। 24 नवंबर को मेडिकल कॉलेज में बच्ची को जन्म देने वाली मुस्कान और उसकी बेटी दोनों स्वस्थ हैं। जेल प्रशासन ने पुष्टि की है कि मुस्कान को नवजात बेटी के साथ बैरक 12A में रखा गया है। यह बैरक महिला कैदियों और छोटे बच्चों के लिए आरक्षित है।
नवजात को मिलेंगी जेल में विशेष सुविधाएं
जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि माँ और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। जेल दिशानिर्देशों के अनुसार, नवजात को जेल परिसर में ही सभी आवश्यक टीके लगाए जाएंगे और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जेल डॉक्टर नियमित रूप से माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। मुस्कान को पोषक भोजन दिया जा रहा है।फिलहाल मुस्कान को जेल का कोई काम नहीं दिया जाएगा। एक महीने बाद हल्के काम सौंपे जा सकते हैं।बच्ची के लिए जेल में क्रेच (झूलाघर) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं और उसे जेल की आंगनवाड़ी में भी पंजीकृत किया जाएगा।
बच्ची की पितृत्व पुष्टि के लिए DNA टेस्ट की मांग
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब मुस्कान के दिवंगत पति सौरभ राजपूत के परिवार ने नवजात बच्ची की पितृत्व की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट (DNA Test) कराने की मांग की।हालांकि, जेल अधीक्षक शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में लिखित अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
क्या है पूरा मामला?
मुस्कान रस्तोगी को उसके बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला के साथ 4 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।एफआईआर के अनुसार, दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मेरठ के इंदिरा नगर स्थित घर में सौरभ की हत्या की, उसके शव के टुकड़े किए, उसे सीमेंट भरे नीले ड्रम में रखा और फिर हिमाचल प्रदेश भाग गए थे।
मुस्कान और उनकी नवजात बेटी को बैरक 12A में रखा गया है, जहां उनके अलावा 21 महिला कैदी और तीन छोटे बच्चे पहले से हैं। जेल सूत्रों के मुताबिक, अन्य महिला कैदियों ने मुस्कान को बेटी के जन्म पर बधाई दी।यह भी बताया गया है कि मुस्कान या उनके दिवंगत पति सौरभ राजपूत के परिवार में से कोई भी रिश्तेदार नवजात बच्ची को देखने अभी तक जेल नहीं आया है।
भारतीय जेलों में महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों के लिए मानवीय और विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने हेतु विस्तृत नियम और दिशानिर्देश बनाए गए हैं। ये नियम मुख्य रूप से मॉडल प्रिजन मैनुअल (Model Prison Manual) और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित हैं।
बच्चों के लिए जो प्रमुख नियम और अधिकार लागू होते हैं, वे निम्नलिखित हैं:
भारतीय जेलों में बच्चों के अधिकार और सुविधाएं
1. रहने और आयु सीमा
एक महिला कैदी अपने बच्चे को अपने साथ तब तक रख सकती है जब तक कि बच्चा 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता। 6 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद, बच्चे को महिला कैदी की सहमति से किसी अनुमोदित शिशु गृह (Crèche) या बाल कल्याण संस्थान में स्थानांतरित किया जाता है, या उसे उसके किसी योग्य रिश्तेदार को सौंप दिया जाता है।
2. स्वास्थ्य और पोषण
बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में कराने की व्यवस्था होती है। जन्म के बाद बच्चे को नियमित टीके (Vaccinations) और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ जेल प्रशासन द्वारा मुफ्त प्रदान की जाती हैं। माँ और बच्चे दोनों के लिए अतिरिक्त पौष्टिक आहार (Special Nutritious Diet) प्रदान किया जाता है। जैसे कि, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला कैदी को सामान्य कैदी के मुकाबले अधिक कैलोरी वाला भोजन दिया जाता है।जेल डॉक्टर माँ और बच्चे के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करते हैं।
3. शिक्षा और विकास
अधिकांश जेलों में, बच्चों के लिए क्रेच (Crèche) या आंगनवाड़ी की सुविधा उपलब्ध होती है। (जैसा कि मुस्कान के मामले में बताया गया है। 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए जेल परिसर के भीतर ही प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। यदि जेल में व्यवस्था न हो, तो उन्हें निकटतम स्कूल में भेजा जाता है। बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े, जूते, खिलौने और किताबें मुफ्त प्रदान की जाती हैं।
4. कानूनी पहचान और स्वतंत्रता
जन्म प्रमाण पत्र: जेल में पैदा हुए बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में जन्मस्थान के रूप में जेल का उल्लेख नहीं किया जाता है, बल्कि शहर/क्षेत्र का नाम लिखा जाता है, ताकि बच्चे के भविष्य पर कोई दाग न लगे।
बच्चे को कानूनी रूप से कैदी नहीं माना जाता है। उनका विकास एक स्वस्थ और सामान्य वातावरण में हो, इसके लिए प्रयास किए जाते हैं।ये दिशानिर्देश सुनिश्चित करते हैं कि भले ही बच्चा जेल में अपनी माँ के साथ रह रहा हो, उसके मानवाधिकारों और एक स्वस्थ बचपन के अधिकार का उल्लंघन न हो।





