नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती भी खुलकर सामने आई हैं। मायावती ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए इस घटना को महिला सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह विवाद मंत्रियों की बयानबाजी के कारण और बढ़ता जा रहा है, जो दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
मायावती ने स्पष्ट कहा कि यह मामला मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से अब तक सुलझ जाना चाहिए था। उन्होंने नीतीश कुमार को सलाह दी कि वे इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखें, इसके लिए पश्चाताप करें और कड़वा होता जा रहा विवाद यहीं समाप्त करने का प्रयास करें। बसपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि जब देश में महिला सुरक्षा से जुड़े अन्य मामले भी सामने आ रहे हों, तब ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
पुलिस मर्यादा, विधान सभा और संसद पर भी सवाल
हिजाब विवाद के साथ-साथ मायावती ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में कथावाचक को पुलिस परेड में गार्ड ऑफ ऑनर देने के मामले पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस परेड और सलामी की अपनी परंपरा, मर्यादा और अनुशासन होता है, जिससे खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस मामले में यूपी पुलिस प्रमुख द्वारा संज्ञान लेने को सकारात्मक कदम बताया, लेकिन कार्रवाई का इंतजार होने की बात भी कही।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 दिसंबर से शुरू हुआ उत्तर प्रदेश विधानसभा का संक्षिप्त शीतकालीन सत्र भी पहले की तरह जनहित और जनकल्याण के मुद्दों से भटक गया। उनका कहना था कि यदि सरकार किसानों की खाद की समस्या सहित जनता से जुड़े सवालों पर गंभीरता से चर्चा करती और सदन में जवाबदेह नजर आती, तो सत्र अधिक सार्थक होता।
इसके अलावा मायावती ने उत्तर प्रदेश विधान सभा के संक्षिप्त शीतकालीन सत्र और संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण, किसानों की खाद की समस्या और जनहित के अन्य मुद्दों पर ठोस चर्चा के बिना ही संसद और विधान सभा सत्र समाप्त हो गए, जो बेहद निराशाजनक है। साथ ही, उन्होंने बांग्लादेश में बिगड़ते हालात और भारत विरोधी गतिविधियों पर भी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से दीर्घकालीन नीति के तहत ठोस कदम उठाने की मांग की।





