भोपाल, 18 मार्च (हि.स.)। म.प्र. मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन द्वारा आयोग में प्रचलित प्रकरण क्र. 9271/भोपाल/2019 में कई सूचना पत्र देने के बावजूद अब तक प्रतिवेदन न भेजने पर उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी), भोपाल इरशाद वली को 31 मार्च को आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिये कहा गया है। डीआईजी भोपाल इरशाद वली के नाम 5 हज़ार रूपये का ज़मानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। यह ज़मानती गिरफ्तारी वारंट पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल पुलिस रेंज, भोपाल के जरिये तामील कराया जायेगा। गौरतलब है कि आयोग को 27 दिसम्बर 2019 को मकान नं. 19-20, शिव नगर कालोनी विदिशा रोड, फेस-1 भोपाल निवासी आवेदिका कविता पत्नी राकेश रावत गोंड व अन्य का आवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आवेदिका ने लेख किया था कि देवरानी व जिठानी के मध्य विवाद होने पर अनावेदक एसआई राकेश तिवारी व अन्य पुलिस थाना, छोला रोड, भोपाल द्वारा थाने में दोनों महिलाओं को बुलाकर मार-पीट करने, अश्लील हरकतें कर 50 हज़ार रूपयों की मांग की गई थी। साथ ही दोनों महिलाओं का अपराध बताये बिना व उनके परिजनों को सूचित किये बिना ही जेल भिजवा देने के अलावा इस संबंध में कहीं शिकायत करने पर हत्या कर देने की धमकी देने की शिकायत की गई थी। इस मामले में आयोग ने 20 जनवरी 2020 से लेकर 24 दिसम्बर 2020 तक डीआईजी भोपाल इरशाद वली को कई नामजद सूचना पत्र भेजकर समय सीमा में प्रतिवेदन देने के लिये कहा गया था। किंतु डीआईजी वली की ओर से प्रतिवेदन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर आयोग द्वारा अब व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 32(ग) के अधीन डीआईजी भोपाल इरशाद वली को नामजद नोटिस जारी कर उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे 31 मार्च 2021 को आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दें। आयोग ने डीआईजी वली के नाम पांच हज़ार रूपये का ज़मानती गिरफ्तारी वारंट 18 मार्च 2021 को ही जारी कर दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/केशव दुबे





