नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली में जन्मी अनु अग्रवाल को 1990 के दशक में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने रातों-रात स्टार बना दिया था।इस फिल्म से मिली लोकप्रियता के बाद भी उनका करियर लगातार सफल नहीं हो पाया। अनु ने कुछ और फिल्मों में काम किया, जैसे किंग अंकल, गजब तमाशा, द क्लाउड डोर, जन्मकुंडली, लेकिन वह लगातार फिल्मों में नजर नहीं आ सकीं।अनु अग्रवाल का जन्म 11 जनवरी 1969 को हुआ था।
एक्सिडेंट ने बदली जिंदगी
1999 में अनु अग्रवाल एक गंभीर रोड एक्सिडेंट की शिकार हो गईं। इस हादसे में वे पैरालाइज्ड भी हो गईं और लगभग 29 दिनों तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद उनकी याददाश्त चली गई थी। 3 साल तक चले उपचार और स्ट्रगल के बाद उनकी याददाश्त वापस आई। इस कठिन दौर में अनु और उनके परिवार ने भारी संघर्ष किया।
योगा और आध्यात्म की ओर रुख
अचानक हुए इस हादसे के बाद अनु अग्रवाल ने अपनी जिंदगी का रुख बदल दिया। उन्होंने योगा और आध्यात्म की ओर ध्यान केंद्रित किया। साल 2001 में स्वस्थ होकर पहाड़ों में ध्यान और योगा का अभ्यास करने लगीं। इसके बाद उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए ‘अनुसुएल: मेमॉयर ऑफ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम द डेड’ नामक किताब भी लिखी।
सोशल एक्टिविस्ट के रूप में नई पहचान
आज अनु अग्रवाल मुंबई में रहती हैं और बच्चों के लिए सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर काम कर रही हैं। वे झुग्गी-झोपड़ी में जाकर गरीब बच्चों को फ्री में योगा सिखाती हैं। उनका कहना है कि यह उनका जीवन का सबसे सुखद और संतोषजनक समय है। सोशल मीडिया पर भी वे अपने जीवन और काम की झलकियां शेयर करती रहती हैं।
फिल्मी दुनिया से जुड़े यादें
अनु अग्रवाल को आज भी उनके फैंस याद करते हैं। आशिकी जैसी फिल्म ने उन्हें जो पहचान दी, वह आज भी उन्हें खास बनाती है। हालांकि फिल्मों से दूरी के बावजूद उनका योगदान और संघर्ष लोगों के लिए प्रेरणादायक बना हुआ है।
आशिकी गर्ल अनु अग्रवाल ने फिल्मों से दूरी बनाने के बाद अपने जीवन को समाज सेवा और योगा के माध्यम से नया मोड़ दिया। एक्सिडेंट और संघर्ष के बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी को सकारात्मक दिशा में मोड़ा और आज बच्चों और जरूरतमंदों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।





