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जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और उत्थान प्रमुख ध्येय: मंत्री ठाकुर

-मंत्री ठाकुर ने की अकादमियों की समीक्षा भोपाल, 29 जून (हि.स.) । जनजातीय और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और उत्थान हमारा प्रमुख ध्येय होना चाहिए। इसके लिए आंचलिक लोक गीतों, भजनों के साथ स्थानीय और घुमंतू जातियों की कला, संस्कृति और कला बोध का संकलन करें। यह बात पर्यटन संस्कृति और आध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर ने मंत्रालय में कालिदास संस्कृत अकादमी, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी और जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की समीक्षा बैठक के दौरान कहीं। सुश्री ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की स्थानीय और जनजातीय कलाओं और संस्कृति का संरक्षण की दिशा में कार्य करें। इसके साथ ही भारतीय दर्शन और वैदिक साहित्य को सरल हिंदी भाषा में अनुवाद कर जन-जन तक पहुँचायें। अथर्व वेद में वर्णित यज्ञ के महत्व की वैज्ञानिक आधार पर व्याख्या करें। इससे भारत-भारतीयता को वैज्ञानिक आधार मिलेगा। रामायण पर आधारित लीलाओं का मंचन जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की समीक्षा बैठक के दौरान सुश्री ठाकुर ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रचलित रामायण पर आधारित लीलाओं का मंचन किया जा सकता है। शबरी लीला, निषाद राज लीला और रामायणी लीला इनमें प्रमुख हैं। सुश्री ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के 52 जिलों के प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों का सर्वेक्षण कर उनका विधानसभावार संकलन करें। समीक्षा में बताया गया कि तुलसी शोध संस्थान में हनुमान चालीसा का चित्रांकन और राम राज्य कला दीर्घा, ओरछा में भगवान श्री राम के 36 गुणों पर आधारित चित्र का प्रदर्शन किया जाएगा। मध्यप्रदेश के कलाकारों को दें अवसर मंत्री ठाकुर ने कहा कि मध्यप्रदेश के कलाकारों को अवसर देने के लिए, अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी प्रदेश स्तर पर संगीत, कला और नृत्य समारोह आयोजित करें। अकादमी के कला पंचांग में ग्वालियर के प्रसिद्ध कलाकार बैजू बावरा पर आधारित समारोह को शामिल करें। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत देशभक्ति और वीर रस पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करें। वहीं, उन्होंने कहा है कि नवदुर्गा पर माँ शक्ति की आराधना पर आधारित ‘शक्ति पर्व’ का आयोजन किया जा सकता है, इसके लिए विभाग प्रयास करे। वैदिक विद्वानों की संगोष्ठी से उपजे विचारों को जन-जन तक पहुँचायें मंत्री ठाकुर का कहना यह भी था कि वैदिक साहित्य को बढ़ावा देने के लिए वैदिक विद्वानों की संगोष्ठी आयोजित करें। इस संगोष्ठी से उपजे भारतीय दर्शन पर आधारित विचारों की व्याख्या सरल भाषा में करें और उसे जन-जन तक पहुँचायें। उन्होंने कालिदास संस्कृत अकादमी को कला पंचांग अनुसार नियमित कार्यक्रम आयोजित करने को निर्देशित किया। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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