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Tuesday, March 3, 2026
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महाराष्ट्र सरकार पर विपक्ष का हमला, सुप्रिया सुले बोलीं-मंत्रियों के विवादों से बिगड़ रही प्रदेश की साख

महाराष्ट्र सरकार में मंत्रियों पर लगे आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एनसीपी की नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि ऐसे विवाद राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और दिल्ली तक सवाल उठ रहे हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी (अजित पवार गुट) के दो मंत्रियों पर लगे गंभीर आरोपों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा है। उन्होंने साफ कहा कि लगातार सामने आ रहे विवाद महाराष्ट्र की साख को कमजोर कर रहे हैं और इससे राज्य की छवि राष्ट्रीय स्तर पर खराब हो रही है।

”दिल्ली तक पूछे जा रहे सवाल”

सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सरकार में शामिल बड़े नेताओं पर इस तरह के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में लोग उनसे पूछ रहे हैं कि “महाराष्ट्र में क्या चल रहा है, क्या एक और मंत्री का विकेट गिर गया?” उनके मुताबिक, इस तरह की चर्चाएं राज्य के लिए अच्छी नहीं हैं और जनता के बीच गलत संदेश जाता है।

माणिकराव कोकाटे के बयान पर नाराजगी

पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे से जुड़े मामले पर भी सुप्रिया सुले ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसानों को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह निंदनीय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोकाटे इस समय अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें बेहतर इलाज मिलना चाहिए।

मनरेगा के नाम पर केंद्र सरकार को घेरा

मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के मुद्दे पर सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह फैसला गलत है और इससे न सिर्फ प्रतीकात्मक नुकसान हुआ है, बल्कि आगे चलकर राज्यों को मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, इसका सीधा असर गरीबों और ग्रामीण योजनाओं पर पड़ेगा।

गठबंधन और बुर्का विवाद पर बयान

एनसीपी (अजित पवार गुट) और शरद पवार गुट के संभावित गठबंधन पर सुप्रिया सुले ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में फैसला स्थानीय नेता ही करेंगे। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े बुर्का विवाद पर उन्होंने कहा कि पहनावा और परंपरा निजी विषय हैं। किसी का घूंघट या बुर्का पहनना उसकी पारिवारिक परंपरा से जुड़ा मामला है और ऐसे मुद्दों पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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