नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एनडीए ने इसे परंपरा तोड़ने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इसे बेवजह का राजनीतिक मुद्दा करार देते हुए पलटवार किया है।
बुधवार (3 दिसंबर) को विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का अभिभाषण हुआ। इसी दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन में मौजूद नहीं रहे, जिस पर एनडीए खेमे से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। गौरतलब है कि तेजस्वी यादव को एक दिन पहले ही मंगलवार को औपचारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष चुना गया था, लेकिन वह तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन से अनुपस्थित रहे।
एलजेपी (आर) ने कसा तंज
चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक दल नेता राजू तिवारी ने तेजस्वी यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह गंभीर नहीं हैं और जनता से उनका कोई सरोकार नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण जैसे अहम मौके पर नेता प्रतिपक्ष का न होना गलत संदेश देता है। तिवारी ने सवाल उठाया कि जब सरकार का एजेंडा और नीतियां सदन में प्रस्तुत की जा रही थीं, तब तेजस्वी की गैरमौजूदगी उनकी जिम्मेदारी से बचने को दर्शाती है।
भाजपा नेताओं का हमला
भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री नीरज बबलू ने कहा कि जनता ने तेजस्वी यादव को पहले ही नकार दिया है, इसलिए वह हताश और निराश नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में नेता प्रतिपक्ष की उपस्थिति बेहद जरूरी होती है, लेकिन तेजस्वी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बबलू ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बिहार के विकास से कोई सरोकार नहीं है।
आरजेडी का पलटवार
एनडीए के आरोपों पर आरजेडी ने पलटवार किया है। पार्टी के एमएलसी उर्मिल ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कोई बहस नहीं होनी थी, इसलिए तेजस्वी यादव की मौजूदगी को अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना तेजस्वी का नाम लिए एनडीए की राजनीति नहीं चलती। ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि आरजेडी के अन्य विधायक और विधान पार्षद सदन में मौजूद थे।
दिल्ली रवाना होने से बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, तेजस्वी यादव शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार (1 दिसंबर) की शाम को पटना से अचानक दिल्ली रवाना हो गए थे। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से भी कोई बातचीत नहीं की, जिससे उनके अचानक दिल्ली जाने को लेकर भी अटकलें तेज हो गई थीं।
राज्यपाल के अभिभाषण में नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। जहां एनडीए इसे परंपरा और जिम्मेदारी से जुड़ा मामला बता रहा है, वहीं आरजेडी इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित आरोप करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और तीखा रूप ले सकता है।





