नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है। राबड़ी देवी को नया आवास आवंटित किया जा चुका है, लेकिन उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बुधवार (26 नवंबर) को साफ कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री यह आवास खाली नहीं करेंगी।RJD के इस रुख पर अब बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिन्होंने इसे RJD के जंगलराज के व्यवहार से जोड़ा है।
‘परेशानी है तो विभाग को लिखें’ – मंत्री नितिन नबीन
RJD के बयान पर मंत्री नितिन नबीन ने कड़ा एतराज़ जताते हुए कहा कि समस्या का समाधान करने का एक संवैधानिक तरीका है। मेरा कहना है कि अगर उनको कोई परेशानी है तो विभाग को लिखना चाहिए, आग्रह करना चाहिए। इसके तरीके हैं। उस आग्रह पर सरकार निश्चित रूप से आगे का निर्णय लेगी। लेकिन इस तरह से अराजक की भाषा बोलना, ये उचित नहीं है।
‘RJD ने संस्कार के हिसाब से बयान दिया’
नितिन नबीन ने RJD के व्यवहार को उनके ‘संस्कार’ से जोड़ते हुए कहा कि उनका यह बयान उनकी मानसिकता को दर्शाता हैबाकी RJD जिस संस्कार से जानी जाती है उस हिसाब से बयान दिया है। उनका व्यवहार उनकी पार्टी के संस्कार को दिखाता है। किस मानसिकता से वो काम करते रहे हैं, उस मानसिकता को दिखाता है। हम जब कहते हैं कि उनके आने का मतलब जंगलराज आना है तो ये घटना भी उनके जंगलराज के व्यवहार को सामने से साबित करता है।
‘घुसपैठियों को हक नहीं दे सकते’ – मंत्री का SIR पर जवाब
इस दौरान, मंत्री नितिन नबीन ने विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ‘SIR’ से क्या तात्पर्य है, मंत्री ने इसका जवाब राष्ट्रीय संसाधनों और घुसपैठियों के हक से जोड़ा।उन्होंने कहा कि देश के लोगों का देश के संसाधनों पर हक होना चाहिए, और घुसपैठियों को वह हक नहीं दिया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे अपने लोगों का हक न देकर बांग्लादेशियों को देंगे, वह नहीं हो सकता।
बता दे कि, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड खाली न करने के RJD के फैसले के पीछे पार्टी ने सुरक्षा और पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधा से जुड़े तर्क दिए हैं।
1. सुरक्षा और पूर्व मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल
RJD का प्राथमिक तर्क सुरक्षा से जुड़ा होता है। पार्टी यह दावा करती है, 10 सर्कुलर रोड का आवास सुरक्षा मानकों के हिसाब से राबड़ी देवी के लिए सबसे उपयुक्त है। नया आवंटित आवास पूर्व मुख्यमंत्री को प्राप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल (Z+ या Z श्रेणी) के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं हो सकता है।
उनका कहना है कि चूंकि राबड़ी देवी एक पूर्व मुख्यमंत्री हैं और बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से आती हैं, इसलिए उनके आवास के लिए विशेष सुरक्षा घेरे और स्थान की आवश्यकता होती है, जो 10 सर्कुलर रोड पर स्थापित हो चुका है।
2. नए आवास की अपर्याप्तता
RJD अक्सर यह तर्क देती है कि नया आवंटित आवास पूर्व मुख्यमंत्री के पद के अनुरूप और परिवार की आवश्यकताओं (जैसे बैठकों, पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए पर्याप्त जगह) के हिसाब से अपर्याप्त है।
3. राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
RJD के कई नेताओं ने बीजेपी (या सत्ताधारी दल) पर राजनीतिक प्रतिशोध के तहत आवास खाली करने का नोटिस देने का आरोप लगाया है। उनका मानना है कि यह आवास खाली कराने की कवायद केवल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जा रही है। RJD का मुख्य रुप से जैसा कि मंत्री नितिन नबीन ने प्रतिक्रिया दी है कि, RJD ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली नहीं करेंगी, जिससे यह मामला कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।
बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास से संबंधित नियम मुख्य रूप से बिहार विधायक आवास आवंटन (संशोधन) अधिनियम और राज्य सरकार के प्रशासनिक फैसलों द्वारा शासित होते हैं।बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास के संबंध में लागू होने वाले मुख्य नियम और कानूनी प्रावधान दिए गए हैं
बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास संबंधी नियम
1. आजीवन आवास का अधिकार (पहले का नियम)
मूल प्रावधान: पहले बिहार में एक ऐसा कानून था जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को पटना में आजीवन (Life Time) सरकारी आवास रखने का अधिकार था।हालाँकि, 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास से संबंधित एक मामले में फैसला सुनाया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास रखने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि सरकारी बंगले सार्वजनिक संपत्ति हैं।
2. बिहार सरकार का संशोधन (2019 और बाद में)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर, बिहार सरकार ने भी अपने नियमों में संशोधन किया।वर्तमान नियमों के तहत, पूर्व मुख्यमंत्रियों को सामान्यतः एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक से दो साल) के लिए ही सरकारी आवास रखने की अनुमति होती है, ताकि वे सत्ता छोड़ने के बाद व्यवस्थित हो सकें।इस निश्चित अवधि के बाद भी यदि वे आवास रखना चाहते हैं, तो उन्हें बाजार दर (Market Rate) पर किराया देना पड़ सकता है, या उन्हें आवंटित आवास तुरंत खाली करना पड़ता है।कई बार, कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा जोखिम (Security Threat) के आधार पर आवास रखने की अनुमति दी जाती है। इस स्थिति में, सुरक्षा अधिकारियों की सिफारिश और राज्य कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होती है।
3. राबड़ी देवी का मामला
राबड़ी देवी के मामले में, उनके पास 10, सर्कुलर रोड का आवास है।चूँकि वह अब राज्य की विधायक या विधान परिषद सदस्य नहीं हैं (या उस पद पर नहीं हैं जिसके तहत उन्हें यह विशेष आवास आवंटित हो), इसलिए उन्हें सामान्यतः आवास खाली करना होता है। RJD हमेशा सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देकर आवास रखने की मांग करती है, लेकिन कानूनी रूप से, राज्य सरकार उन्हें नया आवास आवंटित कर सकती है और पुराने आवास को खाली करने का नोटिस दे सकती है।





