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Monday, April 6, 2026
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दीपावली (दिवाली) व्रत विधि- Diwali (deepawali) Vrat Vidhi in Hindi

दिवाली हिंदुओं के मुख्य त्यौहारों में से एक है। इस वर्ष दिवाली 24 अक्टूबर, 2022 को मनाई जाएगी। दिवाली भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी की खुशी में मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा (Diwali Puja) का विधान है।

दिवाली पूजा विधि (Diwali Puja Vidhi)

स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा निम्न विधि (Diwali Pooja Vidhi) से करनी चाहिए। इस दिन संभव हो तो दिन में भोजन नहीं करना चाहिए। 

घर में शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर तथा चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए। इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए। 

गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इनके साथ- साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, काली मां और कुबेर देव की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय 11 छोटे दीप तथा एक बड़ा दीप जलाना चाहिए। 

सभी छोटे दीप को घर के चौखट, खिड़कियों व छतों पर जलाकर रखना चाहिए तथा बड़े दीपक को रात पर जलता हुआ घर के पूजा स्थान पर रख देना चाहिए। 

पूजा में आवश्यक साम्रगी (Important Things for Diwali Puja)

महालक्ष्मी पूजा या दिवाली  पूजा के लिए रोली, चावल, पान- सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए आदि वस्तुएं पूजा के लिए एकत्र कर लेना चाहिए। 

लक्ष्मी मंत्र (Laxmi Mantra in Hindi)

लक्ष्मी जी की पूजा के समय निम्न मंत्र का लगातार उच्चारण करते रहना चाहिए: ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥ 

दीपावली पूजा मुहूर्त (Deepawali Puja Muhurat)दीपावली के दिन प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी जी की पूजा होती है। मान्यता है कि इस समय लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनुष्य को कभी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। इस साल पूजा का शुभ मुहूर्त है: 

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat): शाम 6:10:29 से लेकर रात को 20:06:20 तक

प्रदोष काल :17:34:09 से 20:10:27 तक
वृषभ काल :18:10:29 से 20:06:20 तक
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 04, 2021 को 06:03 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – नवम्बर 05, 2021 को 02:44 बजे

दिवाली पर निशिता काल मुहूर्त
निशिता काल – 23:39 से 00:31, नवम्बर 05
सिंह लग्न -00:39 से 02:56, नवम्बर 05
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त स्थिर लग्न के बिना
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 04, 2021 को 06:03 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – नवम्बर 05, 2021 को 02:44 बजे

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