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कोरोना में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगा सरकार का साथ, चिन्हीकरण शुरु

– महिला एवं बाल विकास विभाग करेगा ऐसे बच्चों की पहचान बलरामपुर, 06 मई (हि.स.)। कोरोना ने बहुत से परिवारों से उनकी खुशियां हमेशा-हमेशा के लिए छीन ली है। बहुत से ऐसे भी बच्चे हैं, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। ऐसे बच्चे जो अनाथ हो गये हैं या जिनके माता पिता कोरोना को मात देने के लिए अस्पताल में भर्ती हैं,उनके जीवन में फिर से खुशियां लाने के लिए सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से कदम बढ़ाया है। गुरुवार को जिलाधिकारी श्रुति ने बताया कि कोविड-19 से प्रभावित या अनाथ हुए 18 साल से कम उम्र के बच्चों के कल्याण के लिए ऐसे बच्चों को जिले में चिन्हित किया जा रहा है। जिसको लेकर आवश्यक निर्देश दिये जा चुके है। बताया कि चिंहित कर बच्चों की सूची 15 मई तक निदेशक, महिला कल्याण और राज्य बाल संरक्षण आयोग को भेजा जायेगा, ताकि ऐसे बच्चों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके। डीएम ने बताया कि सूची को तैयार करने में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गठित निगरानी समितियों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में गठित ग्राम बाल संरक्षण समितियों से भी इस सम्बन्ध में जानकारी जुटायी जाएगी। इसके साथ ही विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन (1098) और जिला बाल संरक्षण इकाई भी इस प्रकार के बच्चों के बारे में सूचनाएं प्राप्त होने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी या बाल कल्याण समिति को तत्काल मुहैया कराएंगी। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, कोविड के चलते भौतिक प्रस्तुतीकरण के स्थान पर डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा लिया जा सकता है। बच्चों की पहचान जुटाने और सूची तैयार करने में जनपद स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली जाएगी। हेल्पलाइन पर दें ऐसे बच्चों की सूचना बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष करुणेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों या किसी एक को खो दिया है, उनके सम्बन्ध में सूचना कोई भी व्यक्ति चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नम्बर-1098 या महिला हेल्पलाइन-181 पर दे सकता है। ऐसे बच्चों को चाइल्ड लाइन 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। ऐसे बच्चों की सूचना राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हेल्पलाइन 011-23478250 पर भी दी जा सकती है। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु कोविड-19 के संक्रमण के कारण हो गयी है। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता कोविड पाजिटिव नहीं पाए गए किन्तु समस्त लक्षण कोविड-19 के समान ही थे और उपचार के दौरान या उपचार के अभाव में जिनकी मृत्यु हो गयी। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता कोविड के चलते उपचाराधीन हों या किसी अन्य कारण से महामारी के दौरान अस्पताल में भर्ती हों और घर पर बच्चों की देखरेख करने वाला कोई न हो। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता कोविड के चलते होम आइसोलेशन में हों और घर पर ऐसे बच्चों की देखभाल करने वाला कोई न हो। हिन्दुस्थान समाचार/प्रभााकर

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