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Thursday, April 2, 2026
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वंदेभारत से भी आगे निकलेगी यह खास ट्रेन! न बिजली, न डीज़ल… पानी से चलेगी रेलवे की हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए ग्रीन और जीरो-कार्बन भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो डीज़ल और बिजली पर निर्भरता को कम करेगी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय रेलवे तकनीक और पर्यावरण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। वंदेभारत स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन की तारीखों के ऐलान के बाद अब रेलवे एक ऐसे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है, जो आने वाले समय में रेल परिवहन की तस्वीर ही बदल सकता है। यह कोई आम ट्रेन नहीं, बल्कि हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन है, जो न तो डीज़ल पर निर्भर होगी और न ही बिजली पर। खास बात यह है कि इसे पानी से चलने वाली ट्रेन भी कहा जा रहा है, क्योंकि हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के जरिए ऊर्जा पैदा की जाएगी।

अब ट्रैक पर ट्रेन दौड़ाने का रास्ता साफ हो गया है

रेल मंत्रालय के मुताबिक, हरियाणा के जींद में बने हाइड्रोजन प्लांट में ट्रेन के टैंकों में हाइड्रोजन भरने का सफल ट्रायल पूरा कर लिया गया है। इस प्लांट को खासतौर पर हाइड्रोजन के प्रोडक्शन, स्टोरेज और रिफिलिंग के लिए आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिफिलिंग के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया और प्रेशर टेस्ट भी सफल रहा। इसके साथ ही अब ट्रैक पर ट्रेन दौड़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

सभी हाइड्रोजन सिलेंडरों में तय मानकों के अनुसार गैस भरी गई है

लेटेस्ट अपडेट की बात करें तो ट्रेन में लगे सभी हाइड्रोजन सिलेंडरों में तय मानकों के अनुसार गैस भरी गई है। इस ट्रेन में कुल 27 हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं। हर सिलेंडर की क्षमता लगभग 8.4 किलोग्राम हाइड्रोजन की है। इस तरह ट्रेन में एक बार में करीब 226.8 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है। अनुमान है कि 360 किलोग्राम हाइड्रोजन से ट्रेन लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।

सबसे पावरफुल ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन माना जा रहा है

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट (करीब 90 किमी) पर शुरू किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, रिफिलिंग से जुड़े अंतिम चरण के ट्रायल सफल हो चुके हैं और जनवरी 2026 से ट्रैक पर नियमित ट्रायल रन शुरू होने की संभावना है। इसे दुनिया की सबसे लंबी और सबसे पावरफुल ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन माना जा रहा है।

ट्रायल के दौरान ट्रेन की रिफिलिंग प्रक्रिया में प्रेशर, तापमान और लीकेज जैसी सभी तकनीकी जांच की जाएंगी। यह पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होगी, ताकि किसी भी तरह का जोखिम न रहे। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

प्रदूषण को कम करना उद्देश्य

रेलवे मंत्रालय के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है। इसी वजह से भविष्य में इस ट्रेन को खासतौर पर पहाड़ी और हेरिटेज रूट्स पर चलाने की योजना है, जैसे कालका–शिमला जैसे संवेदनशील इलाकों में, जहां प्रदूषण को कम करना बेहद जरूरी है।

2030 तक भारतीय रेलवे का लक्ष्य जीरो कार्बन एमिशन हासिल करना है। देशभर में रेलवे लाइनों का तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा रहा है और इसके साथ-साथ वैकल्पिक ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह ट्रेन उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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