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अपडेट….राजस्थान उपचुनाव : सहानुभूति की लहर में सहाड़ा-सुजानगढ़ में कांग्रेस तो राजसमंद से भाजपा जीती

अपडेट…जयपुर, 02 मई (हि.स.)। राजस्थान में तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों में सालों का रिकार्ड टूट गया है। सहानुभूति की लहर में तीनों विधानसभा सीटों पर दिवंगत विधायकों के रिश्तेदार चुनाव जीत गए हैं। तीन में से दो सीटें सहाड़ा व सुजानगढ़ सत्तारूढ़ कांग्रेस ने तथा राजसमंद सीट भाजपा ने जीती है। सहाड़ा से कांग्रेस उम्मीदवार गायत्री त्रिवेदी ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की है, जबकि राजसमंद से भाजपा उम्मीदवार किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी की जीत का अंतर सबसे कम रहा है। सुजानगढ़ सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मनोज मेघवाल करीब 35 हजार 611 वोट के अंतर से जीते हैं। तीनों सीटों पर सहानुभूति की लहर चली है। तीनों सीटों पर दिवंगत विधायकों के परिजनों को दोनों पार्टियों ने टिकट दिए थे, परिजन तीनों सीटों पर जीतने में कामयाब रहे हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि जीत दर्ज करने वाले तीनों विधायक पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। चुनाव आयोग के मुताबिक तीनों सीटों पर कांग्रेस को सबसे ज्यादा 48.7 प्रतिशत वोट मिले है। जबकि, भाजपा को 37 प्रतिशत और निर्दलीय समेत अन्य दलों को 12.93 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस बार नोटा का बटन भी काफी वोटर्स ने दबाया। करीब 1.35 प्रतिशत वोटर्स ने नोटा को वोट दिया। सुजानगढ़ में 35 हजार 611 वोटों से जीते कांग्रेस के मनोज सुजानगढ़ सीट पर दिवंगत कांग्रेस विधायक व मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के बेटे मनोज मेघवाल ने भाजपा उम्मीदवार खेमाराम मेघवाल को 35 हजार 611 वोटों से हराया है। मनोज मेघवाल को 79 हजार 253 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार खेमाराम मेघवाल को 43 हजार 642 वोट और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सोहनलाल नायक को 32 हजार 210 वोट मिले हैं। मनोज मेघवाल की रविवार को ही कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऐसे में वे घर में ही आईसोलेट रहे, मतगणना केंद्र नहीं गए। यहां कुल नौ उम्मीदवार थे। इनमें अभिनव राजस्थान पार्टी के दौलतराम को 1627, निर्दलीय ओमप्रकाश मेघवाल को 362, जगमाल को 287, मंजू घंटियाल बेदी को 565, मनोज कुमार को 631 तथा हरीराम मेहरड़ा को 905 वोट मिले। यहां 1283 वोट नोटा को गए। सुजानगढ़ में भाजपा की साख बमुश्किल बच पाई। यहां मतगणना के कई राउंड में हनुमान बेनीवाल की आरएलपी ने भाजपा को पछाडक़र तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया था। हालांकि, बाद में भाजपा दूसरे नंबर पर पहुंच गई। भाजपा उम्मीदवार को भीतरघात का सामना करना पड़ा है। सहाड़ा में 42 हजार 200 वोटों से जीती कांग्रेस सहाड़ा सीट पर दिवंगत कांग्रेस विधायक की पत्नी गायत्री त्रिवेदी ने भाजपा उम्मीदवार डॉ. रतनलाल जाट को 42 हजार 200 वोटों से हराया। गायत्री देवी को 81 हजार 700 वोट मिले, जबकि उनसे हारे भाजपा के रतनलाल जाट को 39 हजार 500 और आरएलपी उम्मीदवार बद्रीलाल जाट को 12 हजार 231 वोट मिले। यहां पहले राउंड से ही गायत्री त्रिवेदी आगे रहीं हैं। इन तीन के अलावा यहां पांच अन्य उम्मीदवार भी थे। जिनमें राइट टू रिकॉल पार्टी के ईश्वर चौधरी को 701, निर्दलीय दिनेश कुमार शर्मा 390, मांगीलाल को 322, रामेश्वरलाल को 554 एवं विकास पारीक को 846 वोट मिले। यहां नोटा को 4108 मत गए। सहाड़ा में भाजपा के बागी लादूलाल पितलिया को जबरन चुनावी मैदान से हटने के लिए बाध्य करने के विवाद से भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है। पितलिया के मन में चुनाव न लडऩे देने की टीस के वायरल ऑडियो से भाजपा को नुकसान हुआ। वहीं, दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री त्रिवेदी को सहानुभूति का वोट मिला है। राजसमंद में भाजपा की दीप्ति 5310 वोटों से जीतीं राजसमंद सीट पर दिवंगत भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी की बेटी और भाजपा उम्मीदवार दीप्ति माहेश्वरी ने कांग्रेस उम्मीदवार तनसुख बोहरा को 5310 वोटों से हराया है। दीप्ति माहेश्वरी को 74 हजार 704 यानी 49 प्रतिशत वोट मिले, जबकि तनसुख बोहरा को 69 हजार 394 यानी 46 प्रतिशत वोट मिले हैं। इस चुनाव में तीसरे स्थान पर नोटा रहा, जिसे कुल 1586 वोट पड़े। यहां रालोपा के उम्मीदवार प्रहलाद खटाना (गुर्जर) को 1558, भारतीय ट्राइबल पार्टी के अमरसिंह कालून्धा को 736, राइट टू रिकॉल पार्टी के हितेश शाक्य को 117, निर्दलीय कमलेश भारती को 116, नीरूराम कापड़ी को 125, बाबूलाल सालवी को 208, सुरेश को 848 एवं सोहनलाल भाटी को 792 वोट मिले। राजसमंद में दीप्ति माहेश्वरी और तनसुख बोहरा के बीच मुकाबला टक्कर का रहा। दीप्ति माहेश्वरी जीतीं जरूर हैं लेकिन अंतर ज्यादा नहीं है। भाजपा-आरएसएस के गढ़ राजसमंद में दिवंगत किरण माहेश्वरी की बेटी को जीतने में भी आपसी गुटबाजी, कटारिया के महाराणा प्रताप पर दिए बयान का नुकसान हुआ है। न किसी को नफा-न नुकसान विधानसभा में संख्या बल में कांग्रेस और भाजपा दोनों जहां पहले थे वहीं के वहीं हैं। 3 में से 2 सीटें कांग्रेस और 1 भाजपा के पास थी। अब भी 2 सीट कांग्रेस जीती और एक पर भाजपा। इसलिए किसी का नफा नुकसान नहीं हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप

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