नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सफला एकादशी हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और शुभ व्रत माना जाता है। इसे भगवान विष्णु से संबंधित व्रत कहा जाता है और इसे सच्चे मन से रखने पर कई लाभ प्राप्त होते हैं। यह व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम एकादशी को आता है। ‘सफला’ का अर्थ है – सफलता देने वाली, और मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
सफला एकादशी कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2025 में सफला एकादशी 15 दिसंबर, सोमवार को है। एकादशी का आरंभ 14 दिसंबर को शाम 6:49 बजे होगा और समापन 15 दिसंबर को रात 9:19 बजे होगा। इस व्रत को सही विधि-विधान से रखना आवश्यक है, तभी इसे सफल माना जाता है।
सफला एकादशी व्रत के लाभ
सफला एकादशी रखने मात्र से जीवन की आधी परेशानियां दूर हो जाती हैं और व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है और सच्चे मन से रखने पर सौभाग्य और समृद्धि भी मिलती है। साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
सफला एकादशी व्रत रखने का सही तरीका
व्रत से एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन करना चाहिए और सूर्यास्त के बाद भोजन से परहेज करना चाहिए। एकादशी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु की पूजा के लिए संकल्प लें और उनकी मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद हल्दी, पीले फूल, तुलसी, फल, तिल और पीला चंदन अर्पित करें। दीप और धूप जलाएं और भोग में मिठाई एवं फल चढ़ाएं। सफला एकादशी व्रत निर्जला होता है, लेकिन फल का सेवन किया जा सकता है। इस दौरान अनाज और नमक का सेवन न करें।
सफला एकादशी का पारण
व्रत का पारण अगले दिन करना होता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। उसके बाद दान और दक्षिणा दें; गाय को भोजन कराना शुभ माना जाता है। पारण के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है।
सफला एकादशी का व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि जीवन में सफलता, समृद्धि और मानसिक शांति भी सुनिश्चित करता है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाएं समाप्त होती हैं।




