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Sunday, March 29, 2026
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कुंभ मेले में जाने की कर रहे हैं प्लानिंग, तो घूम लीजिए प्रयागराज के यह धार्मिक स्थल

कुंभ मेले में प्रयागराज जा रहे हैं तो आपके यहां के कुछ और धार्मिक स्थल पर घूम लेना चाहिए। दो दिन में आप अपनी धार्मिक यात्रा को पूरा कर सकते हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। 12 साल के अंदर महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। प्रयागराज में महाकुंभ मेले का मनोरम दृश्य देखने के लिए देश-विदेश से लोग यहां इकठ्ठा होते हैं। साल 2025 में 13 जनवरी से कुंभ मेले की शुरुआत की गई है और 26 फरवरी को समापन होगा। कुंभ मेले में यात्रा करने के लिए लाखों करोड़ों लोग देश विदेश से एकजुट होते हैं। प्रयागराज गंगा स्नान करने के लिए कुंभ मेले का दिन शुभ माना जाता है। महाकुंभ का हिस्सा बनने जा रहे हैं, तो प्रयागराज में और कई धार्मिक स्थल है जहां आप यात्रा कर सकते हैं। 

त्रिवेणी संगम 

प्रयागराज में स्नान करने के लिए नॉर्मल दिन में भी लोग यहां पर आना पसंद करते हैं। लेकिन महाकुंभ के दिनों की बात ही कुछ और होती है। त्रिवेणी संगम गंगा यमुना और सरस्वती नदी का खूबसूरत दृश्य देखने लायक होता है। स्नान करने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्नान करने के बाद आप नौका विहार भी घूम सकते हैं। यहां पर घूमने के लिए सूर्यास्त का समय बेहतरीन माना जाता है। 

आनंद भवन

आनंद भवन को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का आवास कहा जाता है अब इसे संग्रहालय बना दिया गया है। आप यहां पर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई वस्तुओं और दस्तावेज को देख सकते हैं। आपके यहां पर एंट्री के लिए टिकट लेना होता है। संग्रहालय में घूमने के लिए 1 से 2 घंटे चाहिए होता है। 

खुसरो बाग

यह एक कला का सुंदर नमूना पेश करता है जहांगीर के पुत्र खुसरो का मकबरा मौजूद है। इसके अलावा यहां के बाग की सुंदरता देखने लायक है यहां पिकनिक मनाया जा सकता है। इस जगह पर आप सुबह 6:00 से लेकर शाम के 7:00 तक कभी भी घूमने आ सकते हैं। 

किला

साल 1983 में अकबर ने यह किला बनवाया था। आज यह भारतीयों के अधिकार क्षेत्र में है। किले के अंदर बना हुआ अशोक स्तंभ और सरस्वती कुंड पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है। पर्यटक इस जगह के सीमित क्षेत्र को ही देख सकते हैं। 

हनुमान मंदिर 

प्रयागराज में बेहद ही खूबसूरत लेते हुए हनुमान जी की प्रतिमा बनाई गई है। इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है की यहां पर गंगा जी की बाढ़ का जल सबसे पहले आ जाता है। गंगा जी का यह जल हनुमान जी के चरण स्पर्श करके वापस लौट जाता है। महाकुंभ के दौरान इस मंदिर की भव्यता देखने लायक होती है।

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