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Wednesday, March 4, 2026
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114 साल की उम्र में विश्‍व प्रसिद्ध मैराथन धावक फौजा सिंह का निधन, सड़क हादसे में आयी थी गंभीर चोट

114 वर्षीय प्रसिद्ध मैराथन धावक फौजा सिंह का निधन हो गया। जालंधर में एक सड़क दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आयी थी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । विश्व के सबसे प्रसिद्ध मैराथन धावक फौजा सिंह का सोमवार, 14 जुलाई को पंजाब के जालंधर जिले में सड़क हादसे में निधन हो गया। 114 वर्ष के फौजा सिंह अपने पैतृक गांव ब्यास में टहल रहे थे, जब एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शाम को उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना की पुष्टि जालंधर पुलिस ने की है, साथ ही उनके जीवन पर पुस्तक ‘द टर्बन्ड टॉरनेडो’ के लेखक खुशवंत सिंह ने भी इसकी जानकारी दी है।

पुलिस वाहन और चालक की खोज में जुटी

आदमपुर थाने के SHO हरदेवप्रीत सिंह ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद वाहन चालक फरार हो गया है और उसकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर वाहन और चालक की खोज जारी है। घटना लगभग दोपहर साढ़े तीन बजे की बताई गई है, जब फौजा सिंह सड़क पार कर रहे थे। इस बीच, फौजा सिंह के जीवन पर लिखी गई पुस्तक ‘द टर्बन्ड टॉरनेडो’ के लेखक खुशवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्‍होंने लिखा, “मेरा ‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ अब नहीं रहा।”

राज्यपाल ने जताया शोक, सोशल मीडिया पर भी लोगों ने किया दुख प्रकट

पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने फौजा सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं महान मैराथन धावक और अदम्य साहस के प्रतीक सरदार फौजा सिंह जी के निधन से अत्यंत शोकाकुल हूं। 114 वर्ष की उम्र में उन्होंने मेरे साथ ‘नशा मुक्त, रंगला पंजाब’ मार्च में हिस्सा लिया था। उनकी विरासत पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी।” सोशल मीडिया पर भी हजारों लोगों ने इस दुखद समाचार पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

कौन थे फौजा सिंह?

फौजा सिंह, जिन्हें विश्वभर में ‘टर्बन्ड टॉरनेडो’ के नाम से जाना जाता था, उम्र के इस पड़ाव पर भी बेहद सक्रिय और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मैराथन रेसों में हिस्सा लिया और स्वास्थ्य, नशा मुक्ति तथा फिटनेस को बढ़ावा देने वाले सामाजिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से देश ने केवल एक महान धावक ही नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणा भी खो दी है।

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