नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मालेगांव बम विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित को बरी किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने एक विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के रहते यह फैसला अपेक्षित था, इन लोगों को छूटना ही था। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही इस नतीजे का अनुमान था। रेणुका चौधरी ने ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर माफी मांगने से इनकार किया और कहा कि इस शब्द का प्रयोग गलत नहीं था।
रेणुका चौधरी का बयान
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने मालेगांव बम विस्फोट केस में आए फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा, “जब हम ‘मुस्लिम आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग करते हैं, तो फिर ‘हिंदू आतंकवादी’ कहना भी मजबूरी बन जाती है। इसीलिए हम केवल ‘आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग करते हैं।”
यह पूछे जाने पर कि क्या कोई हिंदू भी आतंकवादी हो सकता है, रेणुका चौधरी ने जवाब दिया, “हां, हो सकता है। नक्सलियों को ही देख लीजिए, क्या वे किसी खास मजहब से जुड़े थे? उनका कर्म क्या आतंक जैसा नहीं था?” उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी एक धर्म से नहीं जुड़ा होता, बल्कि यह एक मानसिकता और कार्यप्रणाली है, जो किसी भी समुदाय में पाई जा सकती है। रेणुका ने कहा कि हिंदू आतंकवादी भी हो सकता है।
मालेगांव केस पर अखिलेश यादव का बयान
मालेगांव बम विस्फोट मामले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “देश की आम जनभावना यही है कि जो लोग दोषी हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लोगों की अपेक्षा है कि जो गलत करें, उन्हें कानून के तहत दंड मिले।”
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि, “जो अमेरिका में हो रहा है, लगता है उसे शायद दबाने के लिए इस खबर को सामने लाया गया है। ऐसा लगता है कि एक बड़ी खबर को ढकने के लिए दूसरी खबर को उछाला गया है।” वहीं, अदालत से बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भावुक हो गईं। उन्होंने कोर्ट में रोते हुए कहा, “मेरे ऊपर आतंकवाद का टैग लगाया गया, जिससे मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई। मैं तो एक संन्यासी थी, इसलिए जिंदा रह पाई, जबकि हर दिन मर-मर कर जीती रही।”





