नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हाल ही में दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाए गए ‘मिरर-इमेज’ बैक्टीरिया जीवन के लिए खतरा हो सकते हैं। यह चेतावनी ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक एक शोध पत्र के माध्यम से सामने आई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ‘मिरर-इमेज’ बैक्टीरिया की संरचना प्रकृति में पाए जाने वाले जैविक अणुओं से उलट होती है। अगर ये बैक्टीरिया पर्यावरण में घुस जाते हैं तो वो इंसानों, जानवरों और पौधों के इम्यूनिटी सिस्टम को तबाह कर सकते हैं।
‘मिरर-इमेज’ बैक्टीरिया क्या हैं?
सभी जैविक अणु, जैसे प्रोटीन, डीएनए और आरएनए, एक विशिष्ट दिशा में उन्मुख होते हैं। यह दिशा बाएँ या दाएँ होती है। लेकिन ‘मिरर-इमेज’ बैक्टीरिया की संरचना इसके विपरीत होती है। वैज्ञानिक बैक्टीरिया पर काम कर रहे हैं जिसमें सभी जैविक अणु उलटे बने होंगे। वर्तमान में, प्रयोगशाला में ‘मिरर-इमेज’ प्रोटीन और आनुवंशिक अणुओं का उत्पादन किया गया है, लेकिन एक आदर्श ‘मिरर-इमेज’ जीव बनाने के चरण तक अभी तक नहीं पहुंचा जा सका है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दशकों में यह संभव होगा।
पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के प्रो. वॉन कूपर के अनुसार, ये बैक्टीरिया मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को दरकिनार कर शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे बहुत गंभीर संक्रमण हो सकता है। येल विश्वविद्यालय के प्रो. रुस्लम मेडज़िटोव ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे बैक्टीरिया मिट्टी या धूल में फैलते हैं, तो पर्यावरण स्थायी रूप से दूषित हो सकता है। इसका असर इतना घातक हो सकता है कि यह पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
दुनिया भर में इस मुद्दे पर चर्चा की जाए और उपायों को लागू किया जाए।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने ऐसे बैक्टीरिया पर शोध रोकने का आह्वान किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाता कि इन जीवों से कोई खतरा नहीं है, तब तक इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी से अनुसंधान करना चाहिए और प्रौद्योगिकी का उपयोग नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से करना चाहिए। अब समय आ गया है कि दुनिया भर में इस मुद्दे पर चर्चा की जाए और उपायों को लागू किया जाए।





