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Thursday, April 2, 2026
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पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार, आदेश पर पुनर्विचार की अपील

दिल्ली-NCR में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर लगे प्रतिबंध को लेकर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट दरवाजा खटखटाया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर लगे प्रतिबंध को लेकर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने वर्ष 2018 के उस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है, जिसमें इन पुराने वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई थी। दिल्ली सरकार का कहना है कि इस प्रतिबंध के चलते बड़ी संख्या में वाहन स्वामियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और इस नीति की व्यावहारिकता पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। 

दरअसल, बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में वर्ष 2018 में पारित उस आदेश पर सवाल उठाए हैं, जिसमें 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर एनसीआर में बैन लगाया गया था। सरकार का तर्क है कि यह निर्देश किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन या पर्यावरणीय प्रभाव के ठोस आकलन पर आधारित नहीं था। आवेदन में यह भी बताया गया है कि वर्तमान समय में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कहीं अधिक कड़े और प्रभावी उपाय लागू हैं। इनमें प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र प्रणाली का विस्तृत कवरेज और भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानकों का सफल कार्यान्वयन शामिल है। 

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की दलील

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दिल्ली सरकार ने तर्क दिया है कि पुराने वाहनों पर केवल उनकी उम्र के आधार पर लगाए गए प्रतिबंध वैज्ञानिक और न्यायसंगत आधार पर नहीं टिकते, और इससे NCR के मध्यम वर्ग पर असमान और अनुचित असर पड़ता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र सरकार या वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को निर्देश दे कि 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को लेकर व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। 

दिल्ली सरकार का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों का फैसला वाहन की रियल फिटनेस और प्रदूषण के लेवल के आधार पर होना चाहिए, न कि सिर्फ उसके पंजीकरण की उम्र पर। याचिका में यह भी कहा गया है कि मध्यम वर्गीय नागरिक आमतौर पर अपने वाहनों का उचित रखरखाव करते हैं और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन करते हैं। सरकार ने यह भी दावा किया कि ऐसे वाहनों का वार्षिक माइलेज बहुत कम होता है, जिससे वे वायु प्रदूषण में न के बराबर योगदान करते है। 

सीएम रेखा गुप्‍ता का कहना है कि सरकारों ने समय रहते जरूरी काम नहीं किए, इसी कारण कोर्ट और NGT को हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता। कल को ऐसा भी कहा जा सकता है कि लोग घर से बाहर ही न निकलें। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

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