नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पालतू कुत्ते रखना जितना सुखद अनुभव है, उतनी ही जिम्मेदारी भी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में नहीं रखा जाएगा और डॉग लवर्स चाहें तो उन्हें गोद ले सकते हैं। लेकिन अगर आप घर में कुत्ता पाल रहे हैं, तो उसके लिए कुछ जरूरी नियम और कानूनी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
कुत्तों का रजिस्ट्रेशन है जरूरी
घर में किसी भी नस्ल का कुत्ता पालने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। पंजीकरण स्थानीय नगर निगम या पशु नियंत्रण विभाग में होता है। फीस हर शहर में अलग होती है, जैसे गाजियाबाद में इसे बढ़ाकर 200 से 1000 रुपये कर दिया गया है। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड, कुत्ते की फोटो और वैक्सीनेशन रिकॉर्ड देना जरूरी होता है। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
वैक्सीनेशन के नियम
कुत्तों का वैक्सीनेशन उनकी और आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। पिल्लों को 6–8 हफ्ते की उम्र से ही टीके लगना शुरू हो जाते हैं। इनमें डीएचपीपी (डिस्टेम्पर, हेपेटाइटिस, पैरावायरस, पैराइन्फ्लुएंजा) शामिल हैं। 6 महीने की उम्र तक हर 2-4 हफ्ते में बूस्टर डोज लगती है। इसके बाद हर साल बूस्टर वैक्सीन और रेबीज का टीका लगवाना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जो लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, वही उनका वैक्सीनेशन कराने के जिम्मेदार होंगे।
नियम तोड़ा तो भरना होगा जुर्माना
कुत्तों के मालिकों को कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को ले जाते समय मुंह पर मास्क/पट्टा लगाना अनिवार्य है। कुत्तों द्वारा की गई गंदगी की सफाई मालिक को खुद करनी होगी। कुत्तों की स्वच्छता और स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है नियमित नहलाना, जांच और देखभाल। पालतू कुत्तों को प्रशिक्षण और सामाजिककरण देना जरूरी है ताकि वे दूसरों को नुकसान न पहुंचाएं। अगर कुत्ते के मालिक नियमों का पालन नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गाजियाबाद में नियम तोड़ने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना है। कई हाउसिंग सोसाइटीज़ में कुत्ता रखने के लिए 10 पड़ोसियों की सहमति या NOC भी जरूरी होती है। कुत्ता पालना सिर्फ शौक नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन और साफ-सफाई का ध्यान रखकर आप न सिर्फ अपने पालतू की बल्कि समाज की भी सुरक्षा कर सकते हैं।





