नई दिल्ली, ऱफ्तार डेस्क। ED ने गुरुवार 6 मार्च को तमिलनाडु सरकार के आबकारी मंत्री और DMK नेता सेंथिल बालाजी के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई। अधिकारियों ने करूर समेत तमिलनाडु के अलग-अलग शहरों में 10 स्थानों पर एक साथ छापे मारे।
केंद्रीय सुरक्षा के बीच हुई छापेमारी
ED की टीमों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर छापेमारी की। करूर में शक्ति मेस के मालिक कार्तिक, 80 फीट रोड इलाके के एमसीएस शंकर और रायनूर इलाके में कोंगू मेस के मालिक मणि के घरों पर तलाशी ली गई। इसके अलावा, अन्य शहरों में भी ED ने एक्शन लिया।
क्या है मामला?
सेंथिल बालाजी पर आरोप है कि जब वे AIADMK सरकार में परिवहन मंत्री थे, तब उन्होंने नौकरी देने के बदले रिश्वत ली थी। इस मामले में अगस्त 2022 में ED ने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। 14 जून 2023 को उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे करीब 471 दिन जेल में रहे। सेंथिल बालाजी ने निचली अदालतों और मद्रास हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार, सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
AIADMK से DMK तक का सफर
सेंथिल बालाजी पहले AIADMK के सदस्य थे, लेकिन बाद में DMK में शामिल हो गए। वर्तमान में वे आबकारी विभाग के साथ-साथ विद्युत और उत्पाद शुल्क विभाग भी संभाल रहे हैं। ED की छापेमारी के बाद तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। DMK के नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सही कदम बताया। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। 2 दिसंबर, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार द्वारा उनकी बहाली पर चिंता जताई थी तथा उनके खिलाफ मामले के गवाहों पर पड़ने वाले प्रभाव पर सवाल उठाया था।




