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Thursday, March 12, 2026
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फूट-फूटकर रोते हुए हर्षा रिछारिया ने लिया चौंकाने वाला फैसला, सनातन संस्कृति पर कह दी इतनी बड़ी बात

फूट-फूटकर रोती नजर आईं हर्षा रिछारिया ने सोशल मीडिया और कुछ चैनलों पर भी आरोप लगाया है। वे फूट फूट कर रोते हुए बोली- मेरे गुरुदेव कैलाशानंद गिरी के बारें में भी भला-बुरा कहा गया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाकुंभ 2025 में अपनी खूबसूरती और साध्वी वेशभूषा से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया अपनी छवि खराब होने से परेशान होकर महाकुंभ छोड़ने का किया फैसला। फूट-फूटकर रोती नजर आईं हर्षा रिछारिया ने अपने इस कदम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ चैनलों पर भी आरोप लगाया है। वे फूट फूट कर रोते हुए बोली- मेरे गुरुदेव कैलाशानंद गिरी के बारें में भी भला-बुरा कहा गया, लोगों को इस बात का भी भान नहीं कि एक महिला के बारें में कुछ भी बोलने से भी नहीं कतराएं।

सिर्फ सनातन धर्म का मार्ग अपनाया है

इस महाकुंभ मेले की शुरुआत में ही साध्वी हर्षा रिछारिया सुर्खियों में आई। सोशल मीडिया पर हर्षा रिछारिया को सबसे खूबसूरत साध्वी का टैग मिला। वहीं एक वीडियो वायरल होने के बाद हर कोई उनके बारे में जानने को उत्सुक होंने लगा। इस संबंध में हर छोटे-बड़े मीडिया चैनल उनका इंटरव्यू भी लिया, जहां उनसे पूछा गया कि उन्होंने साध्वी बनने का फैसला क्यों किया, जिसके जवाब में हर्षा रिछारिया ने कहा था कि वे साध्वी नहीं बनी हैं, उन्होंने सिर्फ सनातन धर्म का मार्ग अपनाया है।

शाही सवारी को लेकर भी सवाल उठने लगे

वहीं जहां पहले उन्हें साध्‍वी से संबोधित किया जा रहा था। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद नाम से बुलाया जानें लगा। हर्षा रिछारिया ने सवाल करते हुए कहा, कि क्या सनातन से जुड़ने धर्मं से जुड़ने हर चीजों का त्याग करना पड़ता है, मैंने ये कभी नहीं कहा था कि मैं साध्वी, संत या संन्यासी हूं। मुझे सिर्फ ईश्वर की भक्ति में रमें रहना अच्छा लग रहा है। फिर वहीं शाही सवारी को लेकर भी मुझ पर सवाल उठने लगे, कि बिना किसी त्याग के या संत या संन्यासी बने हम अखाड़ों की सवारी में नहीं बैठ सकते। रही बात शाही सवारी की तो वो हर साल निकलती है। इसमें हर अखाड़ों की सवारी होती हैं जिनमें बहुत से भक्त और गृहस्थ लोग शामिल हुए हैं। लेकिन इसमें मेरे चेहरे के हाईलाइट हो जाने से मुझ पर ये आरोप लगा कि मैंने भगवा चोला नहीं पहना था, बल्कि केवल शॉल ओढ़ा हुआ था। वैसे सच कहूं तो कोई भी सनातानी इस रंग को धारण कर सकता है। फिर वहीं मेरी शादी और बाल सबसे बड़ा मुद्दा बन गया, अपने प्रोफेशन से ब्रेक लेकर धर्म के रास्ते पर चलने का फैसला क्या गलत है। 

महाकुंभ छोड़ने की वजहें भी बताईं

महाकुंभ में प्रवेश के दौरान हर्षा रिछारिया के निरंजनी अखाड़े के रथ पर बैठे नजर आने से विवाद हो गया था। कुछ संतों ने हर्षा के रथ पर बैठने और भगवा वस्त्र पहनने पर आपत्ति जताई, और ये विवाद इतना बढ़ गया है कि इसपर हर्षा रिछारिया ने रोते हुए महाकुंभ छोड़ने का ऐलान कर दिया। हर्षा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह फूट-फूट कर रोती नजर आई वहीं वीडियो में उन्होंने महाकुंभ छोड़ने की वजहें भी बताईं।

पाश्चात्य संस्कृति छोड़ सनातन में आना कोई गुनाह है

हर्षा कहती नजर आ रही हैं कि लोगों को शर्म आनी चाहिए कि एक लड़की जो धर्म से जुड़ने, धर्म को जानने और सनातन संस्कृति को समझने आई थी, उसे कुंभ में रहने तक नहीं दिया गया। जीवन में एक बार आने वाला यह महाकुंभ एक इंसान से छीन लिया गया। पुण्य का तो पता नहीं, लेकिन आनंद स्वरूप जी ने भी नहीं दिया। उन्होनें जो किया उसका पाप उन्हें जरूर भुगतना पड़ेगा। अब मुझे महाकुंभ से दो-तीन दिन में जाना पड़ा रहा है। एक महीने के लिए आई थी, लेकिन मेरे साथ-साथ गुरूदेव को बहुत अपमानित किया गया है। अब गुरूदेव से कभी नजरें नहीं मिल पाऊंगी। अब यहां से वापस मैं उत्तराखंड जाऊंगी, वहीं मेरा घर भी है। साथ ही हर्षा रिछारिया ने सवाल करते हुए ये भी पूछ लिया कि क्या पाश्चात्य संस्कृति छोड़ सनातन में आना कोई गुनाह है।

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